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ब्याज कैसे निकाले: महीने, दिन और साल का ब्याज, उदाहरण के साथ

ब्याज की बुनियाद8 मिनट

ब्याज कैसे निकाले (byaj kaise nikale): पैसा देने की तारीख़ से पूरे महीने गिनिए, फिर बचे हुए दिन, हर दिन महीने का 1/30। ब्याज = मूल × सैकड़ा ÷ 100 × महीने। जैसे ₹50,000 पर ₹2 सैकड़ा, 1 महीना 14 दिन का ब्याज ₹1,466.67।

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ब्याज निकालने का सूत्र

साधारण ब्याज के लिए तीन चीज़ें चाहिए: कितना पैसा दिया (मूलधन), रेट, और समय। सैकड़ा का रेट हर ₹100 पर हर महीने का होता है, इसलिए समय भी महीनों में गिनिए।

ब्याज = मूल × सैकड़ा ÷ 100 × महीने

महीने = पूरे महीने + बचे दिन ÷ 30

रेट साल का प्रतिशत हो, तो यही सूत्र महीने ÷ 12 के साथ चलता है:

ब्याज = मूल × साल का रेट ÷ 100 × महीने ÷ 12

₹1,000 का 10% ब्याज: महीने का या साल का?

यह इस पर है कि कौन कह रहा है। स्कूल के गणित और बैंक में 10% का मतलब साल का है: ₹1,000 पर साल का ₹100, यानी महीने का लगभग ₹8.33। लेन-देन की बोलचाल में सिर्फ़ "परसेंट" कहें तो आम तौर पर महीने का मतलब होता है: हर महीने ₹100, साल का ₹1,200। पूछ लीजिए और लिख लीजिए।

1 महीने, 6 महीने और 1 साल का ब्याज

पहले एक महीने का ब्याज निकालिए, फिर गुणा कीजिए। तीनों उदाहरण ₹10,000 पर ₹2 सैकड़ा के हैं।

1 महीने का ब्याज

10,000 × 2 ÷ 100 = ₹200।

6 महीने का ब्याज

10,000 × 2 × 6 ÷ 100 = ₹1,200।

1 साल का ब्याज

10,000 × 2 × 12 ÷ 100 = ₹2,400। साल की दर हो तो एक ही कदम: 10,000 × 24 ÷ 100 = ₹2,400, साल के 24% पर।

कुछ दिनों का ब्याज

रकम × सैकड़ा × दिन ÷ 3,000, क्योंकि एक दिन महीने का 1/30 है: 10,000 × 2 × 10 ÷ 3,000 = ₹66.67। कितने भी दिन का ब्याज, बैंक के ÷ 365 के साथ, दिन का ब्याज कैलकुलेटर में देखिए।

तारीखें महीने से आगे जाएँ, तो असली सवाल समय गिनने का है। बही-खाते में इसे ऐसे गिनते हैं।

महीने और दिन कैसे गिनें

  1. पूरे महीने तारीख़ से गिनिए। जिस दिन पैसा दिया, उस तारीख़ से एक-एक महीना आगे बढ़िए। 15 जनवरी से एक महीना बाद 15 फ़रवरी है। अगला महीना 15 मार्च को होता, जो 10 मार्च के बाद है, इसलिए 1 महीना पूरा हुआ।
  2. बचे दिन गिनिए। 15 फ़रवरी से 10 मार्च तक 23 दिन।
  3. दोनों जोड़िए। 15 जनवरी से 10 मार्च = 1 महीना 23 दिन, यानी 1 + 23/30 = 1.7667 महीने।

पूरा महीना पूरा ही गिना जाता है, चाहे उसमें 28 दिन हों, 30 या 31: 15 जनवरी से 15 फ़रवरी एक महीना है। सिर्फ़ बचे हुए दिनों को महीने के हिस्से में बदला जाता है, हर दिन 1/30। इसीलिए बही की गिनती कैलेंडर से थोड़ी अलग हो सकती है: इस अवधि में असल में 54 दिन हैं।

उदाहरण: ₹2 सैकड़ा, 1 महीना 14 दिन

आपने 5 मार्च 2026 को ₹50,000 उधार दिए, ₹2 सैकड़ा पर, और पैसा 19 अप्रैल 2026 को वापस आया।

  1. पूरे महीने: 5 मार्च → 5 अप्रैल = 1 महीना।
  2. बचे दिन: 5 अप्रैल → 19 अप्रैल = 14 दिन।
  3. समय: 1 + 14/30 = 1.4667 महीने।
  4. एक महीने का ब्याज: ₹50,000 × 2 ÷ 100 = ₹1,000।
  5. ब्याज: महीने के ₹1,000 + 14 दिन के ₹466.67 = ₹1,466.67।
  6. कुल लौटाना: ₹50,000 + ₹1,466.67 = ₹51,466.67।
कैलकुलेटर में आज़माएँयही उदाहरण ब्याज कैलकुलेटर में खोलिए: ₹50,000 पर ₹2 सैकड़ा, 5 मार्च से 19 अप्रैल

उदाहरण: साल के प्रतिशत वाला रेट

₹2,00,000, साल का 18%, 10 जनवरी 2026 से 25 जून 2026 तक। समय 5 महीने 15 दिन, यानी 5.5 महीने।

  • साल के रेट से: ₹2,00,000 × 18 ÷ 100 × 5.5 ÷ 12 = ₹16,500।
  • सैकड़ा से: साल का 18% ÷ 12 = ₹1.5 सैकड़ा, तो महीने के ₹3,000 × 5.5 = ₹16,500।

दोनों तरीकों से जवाब एक ही आता है। आपके रेट के हिसाब से जो आसान लगे, वह अपनाइए। दोनों के बीच बदलने की पूरी टेबल रुपये सैकड़ा का मतलब वाले लेख में है।

कैलकुलेटर में आज़माएँ₹2,00,000 पर साल के 18% से 5 महीने 15 दिन का ब्याज जाँचिए

मोबाइल से ब्याज कैसे निकाले

फ़ोन का कोई भी कैलकुलेटर चलेगा। सिर्फ़ ×, ÷ और = दबाइए; % का बटन छोड़ दीजिए, वह अलग-अलग फ़ोन में अलग तरह चलता है। अंक बिना कॉमा के लिखिए।

  1. पूरे महीने: रकम × सैकड़ा × महीने ÷ 100 =। ₹50,000 पर ₹2 सैकड़ा, 6 महीने: 50000 × 2 × 6 ÷ 100 = दबाइए, जवाब 6000।
  2. महीने और दिन: पहले दिनों को महीने के हिस्से में बदलिए (दिन ÷ 30), फिर उसे महीनों की जगह लिखिए। 1 महीना 15 दिन = 1.5, तो 50000 × 2 × 1.5 ÷ 100 = 1500।
  3. सिर्फ़ दिन: रकम × सैकड़ा × दिन ÷ 3000 =। 10 दिन: 50000 × 2 × 10 ÷ 3000 = 333.33 (स्क्रीन पर ज़्यादा दशमलव दिखें तो आख़िर में पैसे तक गोल कीजिए)।
  4. साल की % दर: रकम × दर × महीने ÷ 1200 =। ₹2,00,000 पर साल के 18% से 3 महीने: 200000 × 18 × 3 ÷ 1200 = 9000।

29, 30 या 31 तारीख़ को दिया उधार

हर महीने में 31 तारीख़ नहीं होती। 31 जनवरी को पैसा दिया हो, तो आम नियम यह है, और हमारा कैलकुलेटर भी यही मानता है, कि छोटे महीने में महीना उसकी आख़िरी तारीख़ को पूरा होता है। यानी 31 जनवरी से 28 फ़रवरी = 1 महीना (लीप ईयर में 29 फ़रवरी)। आगे जिस महीने में 31 तारीख़ है, उसमें महीना फिर 31 को पूरा होता है।

₹1,00,000, ₹2 सैकड़ा, 31 जनवरी 2026 को दिया
वापसी की तारीख़गिना गया समयब्याज
28 फ़रवरी 20261 महीना₹2,000
1 मार्च 20261 महीना 1 दिन₹2,066.67
31 मार्च 20262 महीने₹4,000
30 अप्रैल 20263 महीने₹6,000

महीने-दिन का हिसाब बनाम असल दिन ÷ 365

बैंक आम तौर पर असल दिनों को 365 दिन के साल से गिनते हैं। एक ही रेट पर (₹2 सैकड़ा = साल का 24%), ₹50,000 पर दोनों तरीकों का फ़र्क़ देखिए:

₹50,000, ₹2 सैकड़ा (साल का 24%)
अवधिबही की गिनतीबही से ब्याजअसल दिनदिन ÷ 365
5 मार्च → 19 अप्रैल 20261 महीना 14 दिन₹1,466.6745₹1,479.45
10 जनवरी → 25 मार्च 20262 महीने 15 दिन₹2,50074₹2,432.88
10 जनवरी → 10 जनवरी 202712 महीने₹12,000365₹12,000
  • फ़रवरी बीच में हो तो बही के तरीके से ₹67.12 ज़्यादा बनता है। फ़रवरी के 28 दिन भी पूरा महीना गिने जाते हैं, और बैंक का एक दिन बही के एक दिन से थोड़ा सस्ता पड़ता है (साल ÷ 365, जबकि बही में महीना ÷ 30)।
  • 31 दिन वाला महीना बीच में हो तो असल दिनों से ₹12.78 ज़्यादा बनता है, क्योंकि 31वाँ दिन भी गिना जाता है।
  • पूरे साल में दोनों से ₹12,000 ही बनता है। फ़र्क़ सिर्फ़ बीच के छोटे-बड़े महीनों से आता है।

दोनों में से कोई तरीका गलत नहीं है। ज़रूरी यह है कि दोनों पक्ष वही तरीका अपनाएँ जो तय हुआ था। सैकड़ा वाले उधार आम तौर पर बही के तरीके से गिने जाते हैं; बैंक या फ़ाइनेंस कंपनी का साल वाला रेट आम तौर पर असल दिनों से। हमारे कैलकुलेटर में दोनों तरीके हैं।

ब्याज निकालने में आम गलतियाँ

  • सैकड़ा को साल का रेट समझ लेना। ₹2 सैकड़ा साल का 24% है, 2% नहीं। साल का 2% मान लें तो पहले उदाहरण में ₹1,466.67 की जगह सिर्फ़ ₹122.22 बनेगा।
  • अनजाने में दोनों तरीके मिला देना। असल दिन गिनकर 30 से भाग देना तीसरा तरीका है, न बही का, न बैंक का; इसे तभी अपनाइए जब यही तय हुआ हो। 10 जनवरी से 25 मार्च के लिए इससे ₹2,466.67 बनता है, जबकि बही से ₹2,500।
  • बकाया ब्याज पर ब्याज लगाना। साधारण ब्याज में ब्याज सिर्फ़ मूल पर लगता है। ₹50,000 पर ₹2 सैकड़ा का साल का ब्याज ₹12,000 है, तो दो साल का ₹24,000, चाहे पहले साल कुछ न चुकाया गया हो। बकाया ब्याज को मूल में जोड़ना चक्रवृद्धि ब्याज है, और यह पहले से तय होना चाहिए: देखिए साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज।
  • बीच के भुगतान भूल जाना। अगर बीच में कुछ पैसा वापस आया, तो हर भुगतान की तारीख़ तक का ब्याज पहले निकालिए। तरीका बीच में पैसा लौटाने पर: पहले ब्याज या पहले मूल वाले लेख में है।
5 छोटे जवाब

ब्याज निकालने से जुड़े आम सवाल

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1 महीने, 6 महीने या 1 साल का ब्याज कैसे निकाले?

पहले एक महीने का ब्याज निकालिए: रकम × सैकड़ा ÷ 100। फिर उसे महीनों से गुणा कीजिए। ₹10,000 पर ₹2 सैकड़ा से महीने का ₹200, 6 महीने का ₹1,200 और साल का ₹2,400। रेट साल के % में हो तो रकम × रेट × महीने ÷ 1,200 कीजिए: ₹2,00,000 पर साल के 18% से 3 महीने का ब्याज ₹9,000।

1 दिन का ब्याज कैसे निकाले?

एक महीने के ब्याज को 30 से भाग दीजिए, महीना कितने भी दिन का हो। ₹50,000 पर ₹2 सैकड़ा से महीने का ₹1,000, यानी एक दिन का लगभग ₹33.33, और 10 दिन का 50,000 × 2 × 10 ÷ 3,000 = ₹333.33। बैंक साल के ब्याज को 365 से भाग देते हैं। दिन का ब्याज कैलकुलेटर कितने भी दिनों के लिए दोनों दिखाता है।

मोबाइल के कैलकुलेटर से ब्याज कैसे निकाले?

रकम × सैकड़ा × महीने ÷ 100 लिखकर = दबाइए; % का बटन दबाने की ज़रूरत नहीं। ₹50,000 पर ₹2 सैकड़ा, 6 महीने: 50000 × 2 × 6 ÷ 100 = ₹6,000। बचे दिन हों तो दिन ÷ 30 को महीनों में जोड़िए: 1 महीना 15 दिन = 1.5, तो 50000 × 2 × 1.5 ÷ 100 = ₹1,500। रेट साल का हो तो 100 की जगह 1200 से भाग दीजिए।

ब्याज में साल 365 दिन का गिनते हैं या 360 का?

भारत में बैंक आम तौर पर असल दिनों को 365 दिन के साल से गिनते हैं; बैंक जमा पर यही इंडियन बैंक्स एसोसिएशन का तय तरीका है। बही में कैलेंडर के महीने गिने जाते हैं और बचा हर दिन महीने का 1/30। 360 दिन का साल थोड़ा महँगा है: ₹1,00,000 पर साल के 12% से 30 दिन का ब्याज 365 दिन से ₹986.30, 360 से ₹1,000। क़रार में कौन-सा तरीका है, देख लीजिए।

ब्याज पता हो तो मूलधन या समय कैसे निकाले?

सूत्र को उलट दीजिए। मूलधन = ब्याज × 100 ÷ (सैकड़ा × महीने), और महीने = ब्याज × 100 ÷ (मूलधन × सैकड़ा)। ₹1.5 सैकड़ा पर 6 महीने में ₹4,500 ब्याज बना, तो मूलधन था 4,500 × 100 ÷ (1.5 × 6) = ₹50,000। ₹50,000 पर ₹1.5 सैकड़ा से इसमें 4,500 × 100 ÷ (50,000 × 1.5) = 6 महीने लगते हैं। ब्याज दर कैलकुलेटर दोनों निकालता है।

इसके लिए कैलकुलेटर

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