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पार्ट पेमेंट पर ब्याज: बीच में लौटाया पैसा पहले ब्याज में या मूल में?

ब्याज की बुनियाद7 मिनट

उधार का कुछ हिस्सा बीच में लौटाना पार्ट पेमेंट या आंशिक भुगतान (anshik bhugtan) कहलाता है। ऐसा पैसा पहले बकाया ब्याज में जाता है, बचा हुआ ही मूल घटाता है। रिवाज यही है, और जब तक अलग से तय न हो, कानूनी तौर पर भी आम तौर पर यही माना जाता है।

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पहले ब्याज: आम नियम

जब उधार लेने वाला कुछ पैसा लौटाता है, तो देने वाला पहले उस दिन तक का बकाया ब्याज निकालता है। लौटाया पैसा पहले उस ब्याज में जाता है। जो बचता है, वही मूल (मूलधन) घटाता है।

  • रकम बकाया ब्याज से कम हो: पूरी रकम ब्याज में जाती है। मूल वैसा ही रहता है, और बचा ब्याज बकाया रहता है।
  • रकम बकाया ब्याज से ज़्यादा हो: ब्याज पूरा चुकता होता है, और बाकी पैसा मूल से कटता है। उस दिन से ब्याज घटे हुए मूल पर लगता है।

बही-खाते में बीच के भुगतान आम तौर पर ऐसे ही लिखे जाते हैं। जब तक कुछ और तय न हुआ हो, यही क्रम मानिए।

पहले ब्याज क्यों?

  • ब्याज पहले बनता है। जो पैसा उधार लेने वाला इस्तेमाल कर चुका, उस पर ब्याज महीने-दर-महीने बनता जाता है। मूल तो आख़िर में लौटाना होता है।
  • बकाया ब्याज पर कुछ नहीं बढ़ता। साधारण ब्याज में पुराना ब्याज बढ़ता नहीं। अगर पैसा पहले मूल में जाए, तो देने वाले का ब्याज बिना कुछ कमाए पड़ा रहेगा, और मूल व आगे का ब्याज घटता जाएगा।
  • बैंक भी यही करते हैं। हर EMI पहले उस महीने का ब्याज चुकाती है, बाकी से लोन घटता है। महीने-दर-महीने का हिसाब EMI और साधारण ब्याज वाले लेख में है।

उदाहरण: दो बार में कुछ पैसा लौटाया

1 जनवरी 2026 को ₹1,00,000 उधार दिए, ₹2 सैकड़ा पर (साधारण ब्याज, साल का 24%)। पूरी रकम पर ब्याज हर महीने ₹2,000 है। उधार लेने वाले ने 15 फ़रवरी को ₹1,500 और 1 मई को ₹20,000 लौटाए।

15 फ़रवरी: ₹1,500 जमा

  • 1 जनवरी से 15 फ़रवरी तक (1 महीना 14 दिन) ₹1,00,000 पर ब्याज: ₹2,933.33।
  • जमा रकम इससे कम है, इसलिए पूरे ₹1,500 ब्याज में गए।
  • बकाया ब्याज: ₹1,433.33। मूल वही ₹1,00,000।

1 मई: ₹20,000 जमा

  • 15 फ़रवरी से 1 मई तक (2 महीने 16 दिन) ₹1,00,000 पर नया ब्याज: ₹5,066.67।
  • कुल बकाया ब्याज: ₹1,433.33 + ₹5,066.67 = ₹6,500।
  • जमा रकम से पहले यह ब्याज चुकता हुआ: ₹6,500 ब्याज में, ₹13,500 मूल में।
  • बचा मूल: ₹1,00,000 − ₹13,500 = ₹86,500। अब से ब्याज हर महीने ₹1,730।
₹1,00,000, ₹2 सैकड़ा, 1 जनवरी 2026 से, पहले ब्याज
तारीख़जमाबकाया ब्याजब्याज मेंमूल मेंबचा ब्याजबचा मूल
15 फ़रवरी₹1,500₹2,933.33₹1,500₹0₹1,433.33₹1,00,000
1 मई₹20,000₹6,500₹6,500₹13,500₹0₹86,500
कैलकुलेटर में आज़माएँयही उधार पार्ट पेमेंट कैलकुलेटर में खोलें: दोनों भुगतान, पहले ब्याज, 1 अगस्त 2026 तककैलकुलेटर में आज़माएँ1 जनवरी से 1 मई तक का ₹8,000 ब्याज कैलकुलेटर में जाँचिए

यही उधार, पहले मूल वाले तरीके से

अब मान लीजिए दोनों ने तय किया था कि लौटाया पैसा पहले मूल घटाएगा। 15 फ़रवरी को ₹1,500 से मूल ₹98,500 रह जाता है और ₹2,933.33 ब्याज बकाया रहता है। 1 मई को ₹98,500 पर नया ब्याज ₹4,990.67 बनता है, कुल बकाया ब्याज ₹7,924 हो जाता है, और पूरे ₹20,000 से मूल ₹78,500 रह जाता है।

वही भुगतान, दो अलग तरीके
पहले ब्याजपहले मूल
1 मई के बाद मूल₹86,500₹78,500
1 मई के बाद बकाया ब्याज₹0₹7,924
1 मई को कुल बकाया₹86,500₹86,424
उसके बाद हर महीने का ब्याज₹1,730₹1,570
1 अगस्त 2026 को कुल बकाया₹91,690₹91,134

पहले मूल वाला तरीका उधार लेने वाले के फ़ायदे का है: 1 मई को ₹76 कम, उसके बाद हर महीने ₹160 कम ब्याज, और 1 अगस्त तक ₹556 कम। यह फ़र्क़ बढ़ता ही जाता है। उधर ₹7,924 का पुराना ब्याज, जब तक पूरा मूल न चुक जाए, बिना कुछ कमाए बकाया पड़ा रहता है। इसीलिए पहले मूल वाले तरीके के लिए दोनों के बीच साफ़ समझौता ज़रूरी है।

बैंक क्यों कहता है कि प्रीपेमेंट मूलधन में जाता है

पार्ट पेमेंट के बारे में खोजें तो ज़्यादातर पेज कहते हैं कि प्रीपेमेंट "मूलधन में जाता है"। बैंक के EMI लोन में यह सही है, और पहले-ब्याज वाले नियम से मेल भी खाता है। हर EMI उस महीने का ब्याज पहले ही चुका देती है, इसलिए प्रीपेमेंट के दिन आम तौर पर कोई ब्याज बकाया नहीं होता, और ऊपर से दिया पूरा पैसा मूलधन घटाता है। कोई EMI बकाया हो तो पैसा आम तौर पर पहले उसे चुकाता है।

सैकड़ा वाले उधार में आम तौर पर EMI नहीं होती। भुगतानों के बीच ब्याज जमा होता रहता है, इसलिए पार्ट पेमेंट पहले उसी ब्याज को चुकाता है। दोनों बातें एक ही नियम हैं, बस उधार अलग तरह के हैं। EMI लोन का महीने-दर-महीने बँटवारा EMI कैलकुलेटर में देखिए।

बकाया ब्याज पर ब्याज नहीं लगता

साधारण ब्याज में ब्याज सिर्फ़ मूल पर लगता है। उदाहरण में 15 फ़रवरी को ₹1,433.33 ब्याज बकाया रहा। फिर भी 15 फ़रवरी से 1 मई का ब्याज ₹1,00,000 पर ही निकला, ₹1,01,433.33 पर नहीं।

ब्याज पर ब्याज तभी लगता है जब उधार चक्रवृद्धि ब्याज पर हो, यानी तय तारीख़ों पर बकाया ब्याज मूल में जोड़ा जाए। देखिए साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज। एक बार में कितना ब्याज वसूला जा सकता है, इसकी भी सीमा हो सकती है: देखिए दामदुपट का नियम।

कानून क्या कहता है, संक्षेप में

पार्ट पेमेंट (आंशिक भुगतान) की रसीद में क्या लिखें

  1. तारीख़, मिली रकम, और पैसा कैसे दिया (नकद, UPI, चेक), यह लिखिए।
  2. उस तारीख़ तक का बकाया ब्याज लिखिए, और रकम कैसे बँटी: इतना ब्याज में, इतना मूल में।
  3. भुगतान के बाद बचा मूल और जो ब्याज अभी बकाया है, वह लिखिए।
  4. पैसा लौटाने वाला उस पर दस्तख़त करे या अपने हाथ से लिखे; लेने वाला भी दस्तख़त करे। दोनों एक-एक कॉपी रखें। उसी दिन फ़ोटो या मैसेज भेजना अतिरिक्त रिकॉर्ड के लिए अच्छा है।

लौटाने वाले के दस्तख़त क्यों ज़रूरी हैं: लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 19 के अनुसार समय-सीमा के भीतर किया भुगतान नई समय-सीमा तभी शुरू करता है, जब भुगतान की बात भुगतान करने वाले की लिखावट में हो या उसके दस्तख़त वाले काग़ज़ पर। सिर्फ़ उधार देने वाले के दस्तख़त वाली रसीद से यह नहीं होता।

कैलकुलेटर में आज़माएँअपने उधार का हिसाब बनाइए: हर भुगतान ब्याज और मूल में बँटा, प्रिंट के लिए तैयार
7 छोटे जवाब

पार्ट पेमेंट और ब्याज: आपके सवाल, सीधे जवाब

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बीच में कुछ पैसा (पार्ट पेमेंट) लौटाने से मूल घटता है क्या?

उतना ही, जितना बकाया ब्याज चुकाने के बाद बचे। उदाहरण में ₹20,000 लौटाए गए जब ₹6,500 ब्याज बकाया था, तो ₹13,500 मूल से कटे और मूल ₹86,500 रह गया। लौटाई रकम बकाया ब्याज से कम हो, तो मूल ज़रा भी नहीं घटता।

पार्ट पेमेंट के बाद ब्याज कैसे निकाले?

भुगतान की तारीख़ तक का ब्याज निकालिए, लौटाई रकम पहले उसमें घटाइए, और जो बचे उससे मूल कम कीजिए। उस तारीख़ से ब्याज नए मूल पर लगेगा। उदाहरण में 1 मई से ₹86,500 पर ₹2 सैकड़ा का ब्याज हर महीने ₹1,730 है। तारीख़ों के साथ पूरा हिसाब पार्ट पेमेंट कैलकुलेटर में देखिए।

क्या भारत में पहले ब्याज काटना कानून है?

आम तौर पर हाँ। मेघराज बनाम बयाबाई (1969) में सुप्रीम कोर्ट ने यही आम नियम दोहराया: ब्याज वाले कर्ज़ में लौटाया पैसा पहले ब्याज में और फिर मूल में जाता है, जब तक दोनों ने कुछ और तय न किया हो। कॉन्ट्रैक्ट एक्ट की धारा 59 से 61 अलग सवाल पर हैं: कई कर्ज़ हों तो पैसा किस कर्ज़ में जाए। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।

क्या उधार लेने वाला कह सकता है कि पैसा सिर्फ़ मूल में जाए?

तभी, जब देने वाला मान ले। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़ लौटाने वाले की अपनी शर्त काफ़ी नहीं है; जब तक देने वाले ने उसी शर्त पर पैसा न लिया हो, पैसा पहले ब्याज में जाएगा। पहले मूल चाहिए तो यह बात उधार की शर्तों या रसीद में लिखिए और दोनों दस्तख़त कीजिए।

बैंक की EMI वाले लोन में पार्ट पेमेंट मूलधन में जाता है क्या?

आम तौर पर हाँ। हर EMI उस महीने का ब्याज पहले ही चुका देती है, इसलिए EMI के ऊपर दिया गया पैसा बकाया मूलधन घटाता है; कोई EMI बकाया हो तो पैसा आम तौर पर पहले उसे चुकाता है। मूलधन घटने से आगे का ब्याज कम होता है। बैंक से पूछिए कि EMI घटेगी या अवधि, और बँटवारा EMI कैलकुलेटर में देखिए।

क्या पार्ट पेमेंट या प्रीपेमेंट पर बैंक चार्ज ले सकता है?

व्यक्ति ने बिज़नेस के अलावा किसी काम के लिए फ़्लोटिंग रेट लोन लिया हो, जैसे फ़्लोटिंग रेट होम लोन, तो नहीं: RBI के नियम बैंक और NBFC को ऐसे लोन पर पूरे या आंशिक प्रीपेमेंट का कोई चार्ज लेने से रोकते हैं। 1 जनवरी 2026 से मंज़ूर बाकी लोन पर चार्ज पहले से बताना ज़रूरी है, और टर्म लोन पर वह सिर्फ़ प्रीपे की गई रकम पर लग सकता है।

क्या पार्ट पेमेंट से उधार वसूली की समय-सीमा बढ़ जाती है?

बढ़ सकती है। उधार के पैसे के लिए केस करने की समय-सीमा आम तौर पर उधार की तारीख़ से तीन साल है। लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 19 के अनुसार, इस समय के भीतर किया गया भुगतान उस दिन से नए तीन साल शुरू करता है, पर तभी जब भुगतान की बात लौटाने वाले की लिखावट में हो या उसके दस्तख़त वाले काग़ज़ पर। इसलिए एंट्री पर उधार लेने वाले के दस्तख़त लीजिए।

इसके लिए कैलकुलेटर

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