नो कॉस्ट EMI ब्याज-मुक्त नहीं होती: बैंक ब्याज लेता है और दुकानदार उतनी ही छूट दे देता है। उस ब्याज पर GST और प्रोसेसिंग फीस आपको देनी पड़ती है। ₹30,000 का फोन, 6 महीने, 15% दर, ₹199 फीस और 18% GST पर ₹463.40 ज़्यादा लगते हैं, यानी करीब 5.33% सालाना (₹0.44 सैकड़ा)।
नो कॉस्ट EMI क्या होता है (no cost EMI kya hota hai)?
नो कॉस्ट EMI में कीमत बराबर EMI में बँट जाती है, पर बैंक अपनी आम EMI दर पर ही लोन देता है। EMI जोड़कर कीमत के बराबर हो जाएँ, इसके लिए दुकानदार या कंपनी ब्याज जितनी छूट पहले ही दे देती है। ₹30,000 का फोन, 6 महीने, कार्ड की EMI दर 15%:
- दुकानदार ₹1,269.95 घटा देता है, इसलिए बैंक का लोन ₹28,730.05 का बनता है।
- बैंक उस पर 15% सालाना ब्याज लेता है। ब्याज ठीक ₹1,269.95 बनता है, इसलिए ₹5,000 की 6 EMI मिलाकर ₹30,000 ही होती हैं।
- ऊपर से हर महीने के ब्याज पर GST (18% पर कुल ₹228.58) और ₹199 प्रोसेसिंग फीस पर ₹35.82 GST।
| मद | रकम |
|---|---|
| बैंक का ब्याज | + ₹1,269.95 |
| दुकानदार की तुरंत छूट | − ₹1,269.95 |
| ब्याज पर GST | + ₹228.58 |
| प्रोसेसिंग फीस | + ₹199 |
| फीस पर GST | + ₹35.82 |
| ज़्यादा दिए | ₹463.40 |
यानी आज ₹30,000 देने के मुकाबले ₹463.40 ज़्यादा। जितने महीने पैसा आपके पास रहा, उस पर यह 5.33% सालाना बैठता है, यानी ₹0.44 सैकड़ा महीना।
क्या नो कॉस्ट EMI सच में फ्री है?
अक्सर पूरी तरह नहीं। ब्याज दुकानदार भरता है, पर उस ब्याज पर GST और प्रोसेसिंग फीस आपकी जेब से जाती है। अगर पूरा पेमेंट करने पर छूट मिल रही थी, तो वह छूट छोड़ना भी खर्च है।
RBI भी यही कहता आया है। 2013 में बैंकों को भेजे सर्कुलर में RBI ने लिखा कि zero percent EMI स्कीमों में ब्याज अक्सर प्रोसेसिंग फीस में छिपा दिया जाता है, और zero percent ब्याज जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं (RBI, 17 सितंबर 2013)। 2022 के क्रेडिट कार्ड निर्देशों में RBI ने कार्ड जारी करने वालों से कहा कि खरीद को EMI में बदलने से पहले मूलधन, ब्याज और दुकानदार की छूट साफ़ दिखाएँ, बिल में भी यही दिखाएँ, और ब्याज वाली EMI को no cost बताकर न बेचें (RBI मास्टर डायरेक्शन, पैरा 6(b)(iii))।
नो कॉस्ट EMI में GST लगता है (no cost EMI me GST lagta hai)?
क्रेडिट कार्ड पर हाँ: हर महीने के ब्याज पर GST लगता है, भले ही वह ब्याज दुकानदार की छूट से भर गया हो, और प्रोसेसिंग फीस पर भी। GST कानून में लोन के ब्याज पर छूट है, पर उस छूट में क्रेडिट कार्ड सेवाओं का ब्याज शामिल नहीं है (Notification 12/2017-Central Tax (Rate), entry 27)। प्रोसेसिंग फीस एक सेवा का चार्ज है, और CBIC ने कहा है कि ऐसी फीस पर GST लगता है (Circular 218/12/2024-GST)।
कैलकुलेटर 18% GST से शुरू होता है, जो इन चार्जों के लिए आम तौर पर बताई जाने वाली दर है। हमने यह दर टैक्स शेड्यूल से पक्की नहीं की है, इसलिए अपने बैंक की शर्तें देखें और बिल में अलग दर हो तो बदल दें।
अगर नो कॉस्ट EMI क्रेडिट कार्ड की नहीं, बल्कि किसी फाइनेंस कंपनी का कंज़्यूमर लोन है, तो ब्याज लोन का ब्याज है, जिस पर GST नहीं लगता, और GST सिर्फ़ फीस पर लगता है। कैलकुलेटर में सिर्फ़ फीस चुनें: तब ₹30,000 वाले उदाहरण में ₹463.40 की जगह ₹234.82 ज़्यादा लगते हैं।
₹30,000 पर नो कॉस्ट EMI: 3 से 24 महीने
| EMI की अवधि | दुकानदार ने भरा ब्याज | ज़्यादा दिए | असली सालाना दर |
|---|---|---|---|
| 3 महीने | ₹734.66 | ₹367.06 | 7.39% (₹0.62 सैकड़ा) |
| 6 महीने | ₹1,269.95 | ₹463.40 | 5.33% (₹0.44 सैकड़ा) |
| 9 महीने | ₹1,792.18 | ₹557.42 | 4.48% (₹0.37 सैकड़ा) |
| 12 महीने | ₹2,301.72 | ₹649.12 | 4.02% (₹0.33 सैकड़ा) |
| 18 महीने | ₹3,284.08 | ₹825.96 | 3.5% (₹0.29 सैकड़ा) |
| 24 महीने | ₹4,219.71 | ₹994.38 | 3.2% (₹0.27 सैकड़ा) |
लंबी अवधि में तय फीस ज़्यादा महीनों में बँट जाती है, इसलिए सालाना दर घटती है, पर ब्याज पर GST रुपयों में बढ़ता है: 12 महीने में ₹649.12, जबकि 6 महीने में ₹463.40। छोटी खरीद में उल्टा होता है। ₹10,000 पर 6 महीने में ₹311.01 ज़्यादा लगते हैं, यानी 10.86% सालाना, क्योंकि वही ₹199 फीस छोटी कीमत का बड़ा हिस्सा है।
नो कॉस्ट EMI या पूरा पेमेंट?
कुछ दुकानें पूरा पेमेंट (कैश, UPI या कार्ड से एक बार में) करने पर छूट देती हैं। EMI चुनने पर यह छूट नहीं मिलती, इसलिए यह भी खर्च में गिनी जाती है। इसे पूरा पेमेंट करने पर छूट में डालें।
| छोड़ी गई छूट | ज़्यादा दिए | असली सालाना दर |
|---|---|---|
| ₹0 | ₹463.40 | 5.33% (₹0.44 सैकड़ा) |
| ₹500 | ₹963.40 | 11.22% (₹0.94 सैकड़ा) |
| ₹1,000 | ₹1,463.40 | 17.27% (₹1.44 सैकड़ा) |
| ₹1,500 | ₹1,963.40 | 23.48% (₹1.96 सैकड़ा) |
इस सालाना दर को उससे मिलाएँ जो आपका पैसा इतने महीनों में कमाता, या जो दूसरा उधार आपको पड़ता। कैलकुलेटर हिसाब दिखाता है, फ़ैसला आपका है।
कैलकुलेटर में आज़माएँ₹30,000 की नो कॉस्ट EMI, पूरे पेमेंट की ₹1,000 छूट छोड़करक्रेडिट कार्ड EMI पर ब्याज कितना (credit card EMI interest)
बिना दुकानदार की छूट वाली आम क्रेडिट कार्ड EMI के लिए ब्याज वाली कार्ड EMI चुनें। ₹30,000, 15%, 6 महीने: EMI ₹5,221.01, ब्याज ₹1,326.08, उस पर GST ₹238.70, और GST समेत फीस ₹234.82। यानी पूरे पेमेंट से ₹1,799.60 ज़्यादा, 20.48% सालाना: GST और फीस 15% की कार्ड दर को काफ़ी ऊपर ले जाते हैं।
कैलकुलेटर में आज़माएँकार्ड EMI: ₹30,000, 15%, 6 महीने, ₹199 फीसकैलकुलेटर हिसाब कैसे लगाता है
- EMI: नो कॉस्ट EMI में कीमत ÷ महीने; कार्ड EMI में बैंक की दर पर आम EMI फार्मूला। पहली EMI खरीद के एक महीने बाद, और पैसों का फ़र्क आख़िरी EMI में।
- ब्याज: हर महीने, जितना बाकी है × बैंक की सालाना दर ÷ 12, जैसे किसी भी reducing दर वाले लोन में। नो कॉस्ट EMI में बैंक उतना ही लोन देता है जितनी EMI की कीमत उसकी दर पर बनती है, बाकी दुकानदार की छूट है, इसलिए छूट और ब्याज बराबर होते हैं।
- GST: जो दर आप डालें, हर महीने के ब्याज पर (उसी EMI के साथ) और फीस पर।
- फीस: GST समेत खरीद के दिन। अगर आपका बैंक इसे पहली EMI के साथ लेता है, तो असली दर थोड़ी कम होगी।
- सालाना दर: वह महीने की दर जिस पर आपके बिल (EMI + GST) पूरे पेमेंट की रकम में से फीस घटाकर बची रकम चुकाते हैं, × 12। यही तरीका हमारा EMI से ब्याज दर कैलकुलेटर अपनाता है। सैकड़ा = यह दर ÷ 12।
ज़्यादा खर्च = ब्याज पर GST + फीस + फीस पर GST + छोड़ी गई छूट
ब्याज वाली कार्ड EMI में ब्याज भी जोड़ें।
छोटी बातों में बैंक अलग होते हैं: कुछ पहले बिल से पहले के दिनों का ब्याज भी लेते हैं, और हर बैंक अपने तरीके से पैसे गोल करता है। आख़िरी बात आपके कार्ड स्टेटमेंट की है; यह पेज दिखाता है कि ऑफ़र कैसे बना है और साल भर के हिसाब से कितना पड़ता है। देखें: हम हिसाब कैसे करते हैं।
7 छोटे जवाबनो कॉस्ट EMI और GST: सीधे जवाब
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नो कॉस्ट EMI कैसे कैलकुलेट होती है?
कीमत बराबर EMI में बँटती है और बैंक अपनी कार्ड EMI दर पर ब्याज लेता है। दुकानदार उस ब्याज जितनी छूट पहले दे देता है, इसलिए EMI जोड़कर कीमत के बराबर होती हैं। ₹30,000 पर 6 महीने, 15%: छूट और ब्याज दोनों ₹1,269.95। ब्याज पर GST और फीस फिर भी आप देते हैं।
क्या नो कॉस्ट EMI सच में फ्री है?
बहुत कम। ब्याज दुकानदार भरता है, पर उस ब्याज पर GST और GST समेत प्रोसेसिंग फीस आपकी होती है, और पूरे पेमेंट की छूट भी हाथ से जा सकती है। ₹30,000, 6 महीने वाले उदाहरण में ₹463.40 ज़्यादा लगते हैं, करीब 5.33% सालाना। ₹1,000 की छूट छोड़ने पर यह 17.27% हो जाता है।
नो कॉस्ट EMI में कितना GST लगता है?
हर महीने के ब्याज पर और प्रोसेसिंग फीस पर, उस दर से जो आपका बैंक लगाता है। आम तौर पर 18% बताया जाता है; अपने बैंक की शर्तें देखें। ₹30,000 पर 6 महीने, 15%: 18% GST ब्याज पर ₹228.58 और ₹199 फीस पर ₹35.82 बनता है।
12 महीने की नो कॉस्ट EMI क्या है?
कीमत 12 बराबर EMI में, और साल भर का ब्याज दुकानदार भरता है। ₹30,000 पर 15% से EMI ₹2,500 और भरा गया ब्याज ₹2,301.72। उस पर GST (₹414.30) और GST समेत ₹199 फीस से कुल ₹649.12 ज़्यादा लगते हैं, करीब 4.02% सालाना।
क्या क्रेडिट कार्ड EMI पर ब्याज नहीं लगता?
लगता है। आम कार्ड EMI में बैंक की EMI दर से ब्याज, उस ब्याज पर GST और अक्सर प्रोसेसिंग फीस लगती है। ₹30,000, 15%, 6 महीने: ब्याज ₹1,326.08, GST ₹238.70 और GST समेत फीस ₹234.82, यानी ₹1,799.60 ज़्यादा, करीब 20.48% सालाना। ब्याज सिर्फ़ नो कॉस्ट ऑफ़र में दुकानदार भरता है।
ब्याज दुकानदार ने भरा, फिर GST क्यों?
क्योंकि ब्याज शून्य नहीं है: बैंक ब्याज लेता है और दुकानदार छूट के ज़रिए उसे आपकी जगह भरता है। GST बैंक के लगाए ब्याज पर बनता है, इसलिए छूट से ब्याज कटने के बाद भी GST रहता है। ₹30,000 पर 6 महीने, 15%: ब्याज ₹1,269.95 और उस पर 18% GST ₹228.58।
नो कॉस्ट EMI लें या पूरा पेमेंट करें?
रुपयों में पूरा पेमेंट कभी महंगा नहीं पड़ता। नो कॉस्ट EMI में GST और फीस जुड़ती है, ₹30,000 पर 6 महीने में ₹463.40, और पूरे पेमेंट की छूट छोड़ें तो और ज़्यादा। बदले में पैसा इतने महीने आपके पास रहता है। कैलकुलेटर की सालाना दर बताती है कि यह कितना पड़ता है, ताकि आप अपने पैसे की कमाई से मिला सकें।
हर आँकड़ा एक ही जाँचे-परखे इंजन से आता है, पैसे-पैसे तक सही। हम हिसाब कैसे करते हैं