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MSME को देर से भुगतान पर ब्याज कैसे निकाले (अभी 17.25%)

उधार और लेन-देन10 मिनट

सूक्ष्म या लघु उद्यम (micro या small enterprise) का बिल देर से चुकाने वाले खरीदार को RBI के बैंक रेट का तीन गुना ब्याज देना होता है, हर महीने चक्रवृद्धि। 7 अक्टूबर 2026 से बैंक रेट 5.75% है, यानी 17.25% सालाना या 1.4375% महीना। ₹2,00,000 छह महीने देर से चुकाने पर ब्याज ₹17,881.94 बनता है।

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MSME देर से भुगतान पर ब्याज दर: अभी 17.25%

MSMED अधिनियम, 2006 की धारा 16 कहती है कि जो खरीदार सूक्ष्म या लघु सप्लायर को समय पर पैसा न दे, उसे RBI के बैंक रेट के तीन गुने पर चक्रवृद्धि ब्याज, हर महीने जोड़कर (monthly rests) देना होगा। यह नियम किसी भी समझौते के बावजूद लागू होता है, इसलिए कॉन्ट्रैक्ट में लिखकर दर घटाई नहीं जा सकती।

MSME दर = 3 × बैंक रेट = 3 × 5.75% = 17.25% सालाना

यानी हर महीने 1.4375%, जो हर महीने बकाया में जुड़ता है: चक्रवृद्धि के बाद साल का लगभग 18.68%।

RBI ने 7 अक्टूबर 2026 के नीति वक्तव्य में बैंक रेट 5.75% किया। इससे पहले यह 5.50% था, जिससे दर 16.50% बनती थी। पूरा इतिहास नीचे है।

MSME देर से भुगतान का ब्याज कौन माँग सकता है

  • सूक्ष्म और लघु उद्यम। कानून यह हक़ "सप्लायर" को देता है: ऐसा सूक्ष्म या लघु उद्यम जिसने अपना मेमोरेंडम भरा हो, यानी आज की भाषा में Udyam रजिस्ट्रेशन। इसमें NSIC, राज्यों के लघु उद्योग निगम और सूक्ष्म-लघु इकाइयों का माल बेचने वाली संस्थाएँ भी आती हैं।
  • बिल से पहले रजिस्ट्रेशन। MSME मंत्रालय के समाधान FAQ के मुताबिक़ Udyam रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, और वह विवाद वाले बिल की तारीख़ से पहले का होना चाहिए।
  • मध्यम उद्यम नहीं। कानून में मध्यम (medium) उद्यम "सप्लायर" नहीं है। मंत्रालय का FAQ एक छूट बताता है: लघु उद्यम बढ़कर मध्यम बन जाए, तो बदलाव के बाद तीन साल तक उसे यह फ़ायदा मिलता रहता है।
  • रिटेल या होलसेल व्यापारी नहीं। जुलाई 2021 से व्यापारी Udyam पर रजिस्टर हो सकते हैं, पर सिर्फ़ प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के फ़ायदे के लिए। मंत्रालय के 1 सितंबर 2021 के ऑफ़िस मेमोरेंडम के मुताबिक़ देर से भुगतान वाले प्रावधान उन पर लागू नहीं होते, और समाधान FAQ कहता है कि काउंसिल NIC कोड 45, 46 और 47 या ट्रेडिंग यूनिट के दावे नहीं लेती।
1 अप्रैल 2025 से सीमाएँ (S.O. 1364(E)): निवेश और टर्नओवर, ज़्यादा से ज़्यादा
श्रेणीनिवेशटर्नओवर
सूक्ष्म₹2.5 करोड़₹10 करोड़
लघु₹25 करोड़₹100 करोड़
मध्यम (दावा नहीं)₹125 करोड़₹500 करोड़

निवेश यानी प्लांट और मशीनरी या उपकरण में लगा पैसा, और दोनों सीमाएँ पूरी होनी चाहिए।

MSME का 45 दिन वाला नियम: ब्याज कब से

धारा 15 के मुताबिक़ खरीदार को लिखित में तय तारीख़ तक पैसा देना है, पर तय की गई मियाद माल स्वीकार करने के दिन से 45 दिन से ज़्यादा कभी नहीं हो सकती। कोई लिखित समझौता न हो, तो पैसा "नियत दिन" (appointed day) से पहले देना है: स्वीकार करने के 15 दिन पूरे होने के अगले दिन से पहले। ब्याज नियत दिन से, या तय तारीख़ के अगले दिन से चलता है (धारा 16)।

स्वीकार करने का दिन वह दिन है जब माल पहुँचा या सेवा दी गई। अगर खरीदार 15 दिन के अंदर लिखकर आपत्ति करे, तो वह दिन गिना जाता है जब सप्लायर आपत्ति दूर करे।

16 सितंबर 2026 को माल स्वीकार हुआ
भुगतान की शर्तपैसा देने का आख़िरी दिनब्याज कब से
कोई लिखित समझौता नहीं1 अक्टूबर 20262 अक्टूबर 2026
30 दिन, लिखित में16 अक्टूबर 202617 अक्टूबर 2026
45 दिन, लिखित में31 अक्टूबर 20261 नवंबर 2026
60 या 90 दिन, लिखित में31 अक्टूबर 2026 (45 दिन से ज़्यादा नहीं)1 नवंबर 2026

तालिका में स्वीकार करने के अगले दिन को पहला दिन गिना है। गिनती से तारीख़ एक दिन आगे-पीछे हो सकती है, इसलिए दावे के लिए सही तारीख़ें अपने CA या वकील से पक्की कर लीजिए।

MSME देर से भुगतान का ब्याज कैसे निकाले: उदाहरण

एक सूक्ष्म उद्यम ने ₹2,00,000 का माल भेजा, जो 16 सितंबर 2026 को स्वीकार हुआ, 45 दिन की उधारी पर। पैसा देने का आख़िरी दिन 31 अक्टूबर 2026 था, पर खरीदार ने 1 मई 2027 तक कुछ नहीं दिया। ब्याज 1 नवंबर 2026 से चलेगा: पूरे 6 महीने। मान लेते हैं कि बैंक रेट 5.75% ही रहता है।

  1. महीने की दर: 17.25% ÷ 12 = 1.4375%।
  2. हर महीने ब्याज = महीने की शुरुआत का बकाया × 1.4375%। इसे बकाया में जोड़ दीजिए: यही मासिक जोड़ (monthly rest) है।
  3. हर महीने यही दोहराइए। आख़िरी रकम में से बिल घटाइए, वही ब्याज है।
₹2,00,000, 17.25% सालाना, हर महीने चक्रवृद्धि, 1 नवंबर 2026 से
महीना पूरा हुआब्याज (1.4375%)कुल बकाया
1 नवंबर 2026 (शुरुआत)₹2,00,000
1 दिसंबर 2026₹2,875₹2,02,875
1 जनवरी 2027₹2,916.33₹2,05,791.33
1 फ़रवरी 2027₹2,958.25₹2,08,749.58
1 मार्च 2027₹3,000.78₹2,11,750.36
1 अप्रैल 2027₹3,043.91₹2,14,794.27
1 मई 2027₹3,087.67₹2,17,881.94

ब्याज = 2,00,000 × (1 + 0.014375)^6 − 2,00,000

फार्मूले से ₹17,881.93 आता है। तालिका हर महीने का ब्याज पैसे तक गोल करती है, जैसे बही में होता है, इसलिए वह ₹17,881.94 पर ख़त्म होती है।

कैलकुलेटर में आज़माएँजाँचिए: ₹2,00,000, 17.25% सालाना, हर महीने चक्रवृद्धि, 6 महीने

बैंक रेट तय रहेगा या बदलेगा? राय अलग-अलग

धारा 16 में "RBI द्वारा अधिसूचित बैंक रेट का तीन गुना" लिखा है, पर किस तारीख़ का, यह नहीं। इसलिए लंबी देरी के बीच बैंक रेट बदले, तो दो तरह से पढ़ा जाता है:

  • तय दर: ब्याज शुरू होने के दिन जो बैंक रेट था, पूरी अवधि वही।
  • बदलती दर: हर मासिक जोड़ पर उस समय का बैंक रेट। कलकत्ता हाई कोर्ट ने V.K. Patel & Co बनाम Simplex Infrastructure (9 जुलाई 2024) में यही माना और शुरुआती दिन वाली दर की सप्लायर की दलील नहीं मानी।

यह एक हाई कोर्ट का फ़ैसला है; दूसरी अदालतें और काउंसिल अलग राय रख सकती हैं। ₹2,00,000 पर 7 जुलाई 2026 से 7 जनवरी 2027 तक ब्याज का फ़र्क़ देखिए, जब 7 अक्टूबर 2026 को बैंक रेट 5.50% से 5.75% हुआ:

₹2,00,000, 7 जुलाई 2026 से 7 जनवरी 2027, हर महीने चक्रवृद्धि
तरीकाकौन सी दरब्याज
तय दरपूरे समय 16.50%₹17,077.68
बदलती दर6 अक्टूबर 2026 तक 16.50%, 7 अक्टूबर 2026 से 17.25%₹17,479.43

इस उदाहरण में नई दर 7 अक्टूबर 2026 से गिनी गई है, जिस दिन RBI ने इसकी घोषणा की, और उसी दिन मासिक जोड़ भी है। बदलाव महीने के बीच में हो, तो काउंसिल उस महीने को अलग तरह से गिन सकती है। आपकी काउंसिल कौन सा तरीका मानती है, अपने CA या वकील से पूछिए।

RBI बैंक रेट का इतिहास और MSME दर

हर तारीख़ उस RBI वक्तव्य से जुड़ी है जिसने दर तय की
RBI नीति की तारीख़बैंक रेटMSME दर, सालानामहीने की
7 फ़रवरी 20256.50%19.50%1.625%
9 अप्रैल 20256.25%18.75%1.5625%
6 जून 20255.75%17.25%1.4375%
5 दिसंबर 20255.50%16.50%1.375%
7 अक्टूबर 20265.75%17.25%1.4375%

6 अगस्त 2025, 1 अक्टूबर 2025, 6 फ़रवरी 2026, 8 अप्रैल 2026, 5 जून 2026, 5 अगस्त 2026 की बैठकों में बैंक रेट नहीं बदला। तारीख़ें मौद्रिक नीति समिति की हर बैठक का आख़िरी दिन हैं। समिति लगभग हर दो महीने में मिलती है, इसलिए दावा भेजने से पहले RBI का नीति पेज देख लीजिए।

दावा कैसे करें: MSE फ़ैसिलिटेशन काउंसिल

  • लिखकर माँगिए। धारा 17 के मुताबिक़ खरीदार को बिल के साथ धारा 16 वाला ब्याज देना है। हिसाब के साथ लिखित माँग भेजना अच्छा है, हालाँकि समाधान FAQ के मुताबिक़ काउंसिल जाने से पहले लीगल नोटिस ज़रूरी नहीं।
  • काउंसिल में भेजिए। कोई भी पक्ष विवाद को सूक्ष्म और लघु उद्यम फ़ैसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC) में भेज सकता है (धारा 18)। वह पहले सुलह (conciliation) कराती है, न हो तो पंचाट (arbitration), और कानून कहता है कि मामला 90 दिन में तय हो। जहाँ सप्लायर है, वहाँ की काउंसिल भारत में कहीं के भी खरीदार के ख़िलाफ़ सुनवाई कर सकती है।
  • ऑनलाइन आवेदन। MSME समाधान पोर्टल आवेदन काउंसिल को भेज देता है। बिल देर से चुका दिया गया हो, तब भी सिर्फ़ ब्याज माँगा जा सकता है। FAQ यह भी कहता है कि लिमिटेशन एक्ट लागू है, और जो रकम सिविल कोर्ट में माँगी जा चुकी, वह काउंसिल में दोबारा नहीं माँगी जा सकती।
  • फ़ैसले को चुनौती। खरीदार को काउंसिल का फ़ैसला (award) कोर्ट में रद्द कराना हो, तो पहले रकम का 75% जमा करना होता है (धारा 19)।

बिल नहीं, बल्कि किसी को दिया उधार वापस चाहिए, तो देखिए उधार दिया पैसा वापस कैसे लें।

खरीदार की तरफ़: इनकम टैक्स

  • बिल का ख़र्च तभी घटेगा जब पैसा दिया जाए। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 37(2)(g) के मुताबिक़ सूक्ष्म या लघु उद्यम को धारा 15 की मियाद के बाद देय रकम का खर्च उसी टैक्स वर्ष में घटाया जा सकता है जिसमें वह असल में चुकाई गई। रिटर्न की तारीख़ तक चुकाने की आम छूट (धारा 37(3)) इस पर लागू नहीं होती। 1961 के कानून में यह धारा 43B(h) थी।
  • ब्याज कभी खर्च में नहीं घटता। MSMED अधिनियम की धारा 23 कहती है कि इसके तहत दिया ब्याज खर्च के रूप में नहीं घटेगा। धारा में अब भी 1961 के कानून का नाम है, इसलिए 2025 के कानून के साथ इसे कैसे पढ़ें, अपने CA से पूछिए।
  • खातों में दिखाना। जिस खरीदार के खाते ऑडिट होते हैं, उसे बकाया रकम और ब्याज सालाना खातों में अलग से दिखाना होता है (धारा 22)।

स्रोत

7 छोटे जवाब

MSME देर से भुगतान का ब्याज: आम सवाल

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MSME देर से भुगतान पर ब्याज दर अभी कितनी है?

17.25% सालाना, हर महीने चक्रवृद्धि। यह RBI के बैंक रेट का तीन गुना है, जो 7 अक्टूबर 2026 से 5.75% है। हर महीने खरीदार को बकाया रकम और पिछले ब्याज पर 1.4375% देना होता है, असल में साल का लगभग 18.68%। RBI बैंक रेट बदले, तो यह दर भी बदलती है।

MSME देर से भुगतान का ब्याज कैसे निकाले?

नियत दिन से, या तय तारीख़ (ज़्यादा से ज़्यादा 45 दिन) के अगले दिन से शुरू कीजिए। हर महीने बकाया को 1.4375% से गुणा करके जोड़ते जाइए। ₹2,00,000 पर 6 महीने का ब्याज ₹17,881.94 बनता है। चक्रवृद्धि ब्याज कैलकुलेटर में महीने-दर-महीने देखिए।

MSME का ब्याज साधारण होता है या चक्रवृद्धि?

चक्रवृद्धि, हर महीने जोड़कर। MSMED अधिनियम की धारा 16 यही कहती है, और MSME मंत्रालय का FAQ भी मासिक चक्रवृद्धि बताता है। ₹2,00,000 पर 6 महीने का साधारण ब्याज ₹17,250 होता, पर सही रकम ₹17,881.94 है।

क्या व्यापारी (trader) MSME 45 दिन वाले नियम का ब्याज माँग सकते हैं?

नहीं। रिटेल और होलसेल व्यापारी Udyam पर रजिस्टर हो सकते हैं, पर मंत्रालय के 1 सितंबर 2021 के ऑफ़िस मेमोरेंडम ने उनके फ़ायदे प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग तक सीमित किए हैं और देर से भुगतान वाले प्रावधान बाहर रखे हैं। समाधान FAQ के मुताबिक़ काउंसिल NIC कोड 45, 46 और 47 के दावे नहीं लेती।

क्या 45 दिन बिल की तारीख़ से गिने जाते हैं?

नहीं, माल स्वीकार करने के दिन से: जिस दिन माल पहुँचा या सेवा दी गई। अगर खरीदार 15 दिन के अंदर लिखकर आपत्ति करे, तो गिनती उस दिन से होती है जब सप्लायर आपत्ति दूर करे। लिखित समझौता न हो, तो पैसा स्वीकार करने के 15 दिन के अंदर देना होता है।

क्या खरीदार और सप्लायर 60 या 90 दिन की उधारी तय कर सकते हैं?

इस नियम के लिए नहीं। धारा 15 कहती है कि लिखित में तय मियाद स्वीकार करने से 45 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकती, और धारा 16 का ब्याज किसी भी समझौते के बावजूद लगता है। लंबी उधारी लिख देने से 45वें दिन के बाद ब्याज चलना नहीं रुकता।

क्या मध्यम (medium) उद्यम MSME देर से भुगतान का ब्याज माँग सकता है?

आम तौर पर नहीं। कानून यह हक़ सिर्फ़ सूक्ष्म और लघु उद्यमों को देता है। MSME मंत्रालय का FAQ एक छूट बताता है: लघु उद्यम बढ़कर मध्यम बने, तो बदलाव के बाद तीन साल तक उसके ग़ैर-टैक्स फ़ायदे, यह ब्याज भी, बने रहते हैं।

इसके लिए कैलकुलेटर

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