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उधार वसूली की समय-सीमा: 3 साल का नियम, तारीख़ों के साथ

उधार और लेन-देन7 मिनट

भारत में उधार की वसूली का केस आम तौर पर 3 साल में करना होता है, उधार देने के दिन से (लिमिटेशन एक्ट, अनुच्छेद 19), पैसा माँगने के दिन से नहीं। इससे पहले दस्तख़त वाली स्वीकृति या दस्तख़त वाला आंशिक भुगतान नए 3 साल शुरू करता है। उदाहरण: 10 मार्च 2024 को दिए ₹80,000 का केस 10 मार्च 2027 तक।

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3 साल की मियाद कब से गिनी जाती है?

लिमिटेशन एक्ट की अनुसूची हर तरह के दावे का अलग अनुच्छेद देती है। आम उधार के लिए नीचे हर लाइन में मियाद 3 साल है; फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि गिनती किस दिन से शुरू होती है।

उधार और ब्याज की मियाद (सब में 3 साल)
आपकी स्थितिअनुच्छेदमियाद कब से
नक़द, UPI या बैंक ट्रांसफर से दिया उधार19जिस दिन उधार दिया
चेक से दिया उधार20जिस दिन चेक का पैसा निकला (क्लियर हुआ)
"माँगने पर लौटाना" वाला उधार21जिस दिन उधार दिया, माँगने के दिन से नहीं
बकाया ब्याज25जिस दिन ब्याज देय हुआ
उधार लेने वाले के दस्तख़त वाला लिखा हिसाब26जिस दिन हिसाब लिखकर दस्तख़त हुए
माँगने पर देय प्रोनोट35प्रोनोट की तारीख़
तय तारीख़ पर देय प्रोनोट31जिस दिन रकम देय हो
किस्तों वाला प्रोनोट या बॉन्ड36, 37हर किस्त की तारीख़; या चूक का दिन, अगर एक किस्त चूकने पर पूरी रकम देय हो
ऐसा दावा जिसका अलग अनुच्छेद नहीं113जिस दिन केस करने का हक़ बना
  • पैसा माँगने से मियाद आगे नहीं खिसकती। "माँगने पर लौटाना" वाला उधार भी उसी दिन से गिना जाता है जिस दिन दिया गया।
  • तय तारीख़ वाला लोन एग्रीमेंट (प्रोनोट नहीं) ऊपर की किसी लाइन में सीधे नहीं आता। उसकी मियाद कब से गिनी जाएगी, यह अलग हो सकता है, इसलिए वकील से पूछिए।
  • चेक बाउंस की अपनी, बहुत छोटी समय-सीमाएँ NI एक्ट में हैं: देखिए उधार दिया पैसा वापस कैसे लें।
  • प्रोनोट की पूरी बात प्रोनोट: ब्याज, वैधता और फॉर्मेट में है।

मियाद फिर से कैसे शुरू होती है: दस्तख़त, या दस्तख़त वाला भुगतान

दो बातें नए 3 साल शुरू करती हैं। दोनों तभी काम करती हैं जब चल रही मियाद ख़त्म होने से पहले हों।

  1. दस्तख़त वाली स्वीकृति (धारा 18)। उधार लेने वाला, या उसका अधिकृत एजेंट, ऐसा लिखा काग़ज़ दस्तख़त करे जिसमें कर्ज़ माना गया हो। दस्तख़त के दिन से नए 3 साल गिने जाते हैं। रकम ठीक-ठीक न लिखी हो, या लिखा हो कि अभी चुकाने का समय नहीं आया, या साथ में चुकाने से मना किया हो, तब भी यह स्वीकृति मानी जाती है।
  2. लिखित में माना गया आंशिक भुगतान (धारा 19)। उधार लेने वाला कर्ज़ में कुछ पैसा दे, और उस भुगतान की बात उसकी अपनी लिखावट में हो या उसके दस्तख़त वाले काग़ज़ पर। भुगतान के दिन से नए 3 साल गिने जाते हैं। इस धारा में सिर्फ़ पैसा आ जाना, बिना ऐसे लिखे, काफ़ी नहीं है।

WhatsApp मैसेज और UPI भुगतान

चैट और UPI स्टेटमेंट इस बात के अच्छे सबूत हैं कि पैसा दिया और लौटाया गया। भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सबूत में लेने देता है (धारा 61), और कोर्ट में पेश करते समय धारा 63 का सर्टिफ़िकेट चाहिए। पर धारा 18 और 19 उधार लेने वाले के दस्तख़त वाला लिखा काग़ज़ माँगती हैं, या ऐसा भुगतान जिसकी बात उसकी लिखावट या दस्तख़त वाले काग़ज़ में हो। चैट या UPI एंट्री इस कसौटी पर खरी उतरती है या नहीं, यह मामले की बातों पर टिका है, इसलिए मियाद को इसके भरोसे मत छोड़िए। काग़ज़ पर दस्तख़त भी लीजिए।

उदाहरण: ₹80,000 पर ₹1 सैकड़ा, दस्तख़त वाले आंशिक भुगतान के साथ

10 मार्च 2024 को UPI से ₹80,000 उधार दिए, लौटाने की कोई तारीख़ तय नहीं, ब्याज ₹1 सैकड़ा (साल का 12%, साधारण)।

  • मियाद शुरू: 10 मार्च 2024 (अनुच्छेद 19)। केस की आख़िरी तारीख़: 10 मार्च 2027।
  • आंशिक भुगतान: 1 फ़रवरी 2026 को उधार लेने वाला ₹10,000 देता है और उसकी एंट्री पर दस्तख़त करता है। तब तक ₹80,000 पर 22 महीने 22 दिन का ब्याज: ₹18,186.67।
  • पहले ब्याज: पूरे ₹10,000 ब्याज में जाते हैं। मूल ₹80,000 ही रहता है और ₹8,186.67 ब्याज अभी बाकी है। देखिए पहले ब्याज क्यों कटता है।
  • नई आख़िरी तारीख़: भुगतान से नए 3 साल, 1 फ़रवरी 2029।
10 मार्च 2024 को ₹1 सैकड़ा पर दिए ₹80,000, 1 फ़रवरी 2026 को ₹10,000 जमा
तारीख़क्या हुआउस दिन बकायाकेस की आख़िरी तारीख़
10 मार्च 2024उधार दिया (UPI)₹80,00010 मार्च 2027
1 फ़रवरी 2026₹10,000 जमा, दस्तख़त के साथ₹88,186.671 फ़रवरी 2029
10 मार्च 2027पुरानी आख़िरी तारीख़ निकली₹98,8001 फ़रवरी 2029
1 फ़रवरी 2029नई आख़िरी तारीख़, अगर आगे कुछ न हो₹1,16,986.671 फ़रवरी 2029

दस्तख़त वाली एंट्री न होती, तो उधार देने वाले को 10 मार्च 2027 तक केस करना पड़ता। उसके साथ 1 फ़रवरी 2029 तक का समय है, पर ब्याज हर महीने ₹800 चलता रहता है, इसलिए दावे की रकम भी बढ़ती है।

कैलकुलेटर में आज़माएँ10 मार्च 2024 से 1 फ़रवरी 2026 तक का ₹18,186.67 ब्याज जाँचिएकैलकुलेटर में आज़माएँयह उधार पार्ट पेमेंट कैलकुलेटर में खोलिए: 1 फ़रवरी 2029 को ₹1,16,986.67 बकाया

क्या 3 साल बाद उधार वसूल हो सकता है?

कोर्ट के रास्ते आम तौर पर नहीं। लिमिटेशन एक्ट की धारा 3 कहती है कि मियाद बीतने के बाद किया गया केस ख़ारिज किया जाएगा, चाहे उधार लेने वाला यह बात उठाए या नहीं। मियाद ख़त्म होने के बाद की स्वीकृति या भुगतान धारा 18 और 19 में उसे फिर शुरू नहीं करते, क्योंकि दोनों का मियाद के भीतर होना ज़रूरी है।

एक रास्ता बचता है: अगर उधार लेने वाला मियाद बीते कर्ज़ का पूरा या कुछ हिस्सा चुकाने का नया वादा लिखकर, अपने दस्तख़त से दे, तो भारतीय संविदा अधिनियम (Contract Act), 1872 की धारा 25(3) इसे वैध अनुबंध मानती है, और उसी रूप में इसे लागू करवाया जा सकता है।

केस जीतने के बाद: डिक्री लागू करवाने के 12 साल

3 साल का नियम केस दायर करने के लिए है। कोर्ट पैसे की डिक्री दे दे, तो अनुच्छेद 136 उसे लागू (execution) करवाने के लिए 12 साल देता है, उस दिन से जब डिक्री लागू होने लायक़ हो; और अगर डिक्री तय तारीख़ या किस्तों में भुगतान का आदेश दे, तो उस भुगतान में चूक के दिन से।

आख़िरी दिन कैसे गिनें

  • पहला दिन नहीं गिना जाता (धारा 12(1))। इसलिए 10 मार्च 2024 से 3 साल 10 मार्च 2027 तक चलते हैं।
  • आख़िरी दिन कोर्ट की छुट्टी हो: कोर्ट खुलने वाले दिन केस किया जा सकता है (धारा 4)।
  • आख़िरी दिन के भरोसे मत रहिए। नोटिस, काग़ज़ और कोर्ट फ़ीस में समय लगता है, और सही दिन ऐसी बातों पर टिक सकता है जो वकील को देखनी होंगी।

स्रोत

6 छोटे जवाब

उधार वसूली की मियाद: सवाल-जवाब

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क्या 3 साल बाद उधार वसूली का केस हो सकता है?

आम तौर पर नहीं। लिमिटेशन एक्ट की धारा 3 कहती है कि मियाद के बाद किया गया केस ख़ारिज होगा, चाहे उधार लेने वाला यह बात न उठाए। अपवाद: 3 साल पूरे होने से पहले दस्तख़त वाली स्वीकृति या दस्तख़त वाले आंशिक भुगतान से मियाद फिर शुरू हुई हो, या उधार लेने वाले ने बाद में पुराना कर्ज़ चुकाने का लिखित, दस्तख़त वाला वादा दिया हो।

3 साल उधार की तारीख़ से गिने जाते हैं या पैसा माँगने के दिन से?

उधार की तारीख़ से। उधार दिए पैसे के लिए, "माँगने पर लौटाना" वाले उधार के लिए भी, अनुच्छेद 19 और 21 मियाद उसी दिन से शुरू करते हैं जिस दिन उधार दिया गया। बाद में पैसा माँगने से यह आगे नहीं खिसकती। चेक से उधार दिया हो, तो मियाद चेक का पैसा निकलने के दिन से शुरू होती है (अनुच्छेद 20)।

क्या WhatsApp मैसेज या UPI भुगतान से मियाद फिर शुरू होती है?

इसके भरोसे मत रहिए। धारा 18 उधार लेने वाले के दस्तख़त वाली लिखित स्वीकृति माँगती है, और धारा 19 ऐसा आंशिक भुगतान जिसकी बात भुगतान करने वाले की लिखावट में हो या उसके दस्तख़त वाले काग़ज़ पर। चैट या UPI एंट्री यह कसौटी पूरी करती है या नहीं, यह मामले पर टिका है, इसलिए काग़ज़ पर दस्तख़त भी लीजिए।

कर्ज़ की लिखित स्वीकृति (acknowledgment) किसे माना जाता है?

ऐसा लिखा काग़ज़ जिसमें कर्ज़ माना गया हो, और जिस पर उधार लेने वाले या उसके अधिकृत एजेंट ने 3 साल पूरे होने से पहले दस्तख़त किए हों। धारा 18 के अनुसार रकम ठीक-ठीक न लिखी हो, चुकाने का समय न आने की बात हो, या चुकाने से मना किया हो, तब भी यह गिनी जाती है। दस्तख़त के दिन से नए 3 साल चलते हैं।

पैसे की डिक्री कितने साल तक लागू करवा सकते हैं?

12 साल तक। लिमिटेशन एक्ट के अनुच्छेद 136 के अनुसार, डिक्री लागू होने लायक़ होने के दिन से 12 साल के भीतर उसे लागू करवाने की अर्ज़ी दी जा सकती है। यानी 3 साल का नियम केस दायर करने का है; डिक्री मिलने के बाद कोर्ट से वसूली के लिए कहीं ज़्यादा समय मिलता है।

आख़िरी दिन कोर्ट की छुट्टी हो तो क्या करें?

कोर्ट जिस दिन खुले, उस दिन केस किया जा सकता है (धारा 4)। गिनती में वह दिन नहीं गिना जाता जिससे मियाद शुरू होती है (धारा 12), इसलिए 10 मार्च 2024 से 3 साल 10 मार्च 2027 तक चलते हैं। फिर भी आख़िरी दिन के भरोसे मत रहिए: नोटिस और काग़ज़ में समय लगता है।

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