हाँ। दोस्त या रिश्तेदार को ब्याज पर पैसे देना भारत में कानूनी है। दिक्कत तब होती है जब आप बिना ज़रूरी लाइसेंस के इसे धंधे की तरह करें, आप पर लागू सीमा से ज़्यादा ब्याज लें, या धमकी से वसूली करें। उदाहरण: ₹2 सैकड़ा यानी 24% सालाना, जो हमारी जाँची हर राज्य सीमा से ऊपर है।
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क्या ब्याज पर पैसे देना कानूनी है?
लोग पूछते हैं "byaj par paise dena legal hai ya illegal"। सीधा जवाब: legal है। हमने जो कानून पढ़े, उनमें से कोई भी ब्याज पर उधार देने पर रोक नहीं लगाता। संविधान में "साहूकारी और साहूकार" राज्य का विषय है (राज्य सूची, प्रविष्टि 30), इसलिए नियम राज्य-दर-राज्य अलग हैं, और ज़्यादातर नियम उन लोगों के लिए हैं जो धंधे के तौर पर उधार देते हैं। ब्याज पर उधार तीन हालात में कानून से टकराता है:
- आप धंधे की तरह उधार देते हैं और आपके राज्य में ज़रूरी लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नहीं है।
- आप पर लागू सीमा से ज़्यादा ब्याज लेते हैं। ज़्यादातर सीमाएँ साहूकारों पर लागू होती हैं; कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में "अत्यधिक ब्याज" लेना किसी के लिए भी मना है।
- धमकी या ज़ोर-ज़बरदस्ती से वसूली करते हैं। यह अपराध है, चाहे आप कोई भी हों।
कानून की नज़र में साहूकार कौन है?
राज्यों के साहूकारी कानून उधार देने के धंधे पर लागू होते हैं। महाराष्ट्र का 2014 का कानून इसे "नकद या वस्तु के रूप में उधार देने का धंधा" कहता है। तमिलनाडु का 1957 का कानून उसे साहूकार मानता है जिसका मुख्य या साइड का काम उधार देना और वसूलना है। अदालतें एक उधार नहीं, पूरा तरीका देखती हैं:
- बॉम्बे हाई कोर्ट (अशोक कमर्शियल एंटरप्राइज़ेज़ बनाम हबटाउन लिमिटेड, 21 जनवरी 2026) ने पुराने फ़ैसलों का सहारा लिया कि साहूकारी के धंधे में "सिस्टम, बार-बार होना और निरंतरता" चाहिए, और एक अकेला लेन-देन कानून की रोक में नहीं आता।
- केरल हाई कोर्ट (मनोज जॉर्ज बनाम केरल राज्य, 4 दिसंबर 2024) ने एक बार ₹6 लाख उधार देने वाले व्यक्ति पर चल रहा केस रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एक-दो बार दिया गया हाथ-उधार "साहूकारी" नहीं है, और ऐसा मानने से मुसीबत में लोग एक-दूसरे की मदद करना बंद कर देंगे।
जितनी बार और जितने ज़्यादा लोगों को आप उधार देते हैं, मामला उतना ही धंधे जैसा दिखता है। आपके मामले में रेखा कहाँ है, यह बातों पर टिका है; अगर आप नियमित रूप से उधार देते हैं, तो वकील से पूछें।
किन राज्यों में साहूकारी लाइसेंस चाहिए?
ये नियम हर राज्य के अपने कानून से लिए गए हैं और धंधे के तौर पर उधार देने वालों पर लागू होते हैं। परिवार या दोस्त को एक बार दिया उधार इनका विषय नहीं है।
| राज्य | कानून क्या माँगता है | बिना इसके धंधा करें तो |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | लाइसेंस (साहूकारी (विनियमन) अधिनियम, 2014) | अदालत को आपका मुकदमा खारिज करना होगा (धारा 13)। 7 साल तक जेल, ₹1 लाख तक जुर्माना, या दोनों (धारा 39, 2026 के संशोधन के बाद)। |
| कर्नाटक | लाइसेंस (मनी-लेंडर्स एक्ट, 1961, धारा 5)। फ़रवरी 2025 से, जिसका मुख्य या साइड का काम ब्याज पर उधार देना है, उसे डिप्टी कमिश्नर के यहाँ रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा (2025 का कानून, धारा 3)। | बिना वैध लाइसेंस वाले साहूकार के पक्ष में अदालत डिक्री नहीं देगी (धारा 11)। |
| तमिलनाडु | लाइसेंस (मनी-लेंडर्स एक्ट, 1957, धारा 3)। 19 नवंबर 2025 से उधार देने वाली संस्थाओं को, जिनमें वे लोग भी हैं जिनका मुख्य या साइड का काम उधार देना है, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा (2025 का कानून, धारा 5)। | जुर्माना (1957 का कानून, धारा 17)। बिना रजिस्ट्रेशन उधार: 3 साल तक जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना (2025 का कानून, धारा 18)। |
| केरल | लाइसेंस (मनी-लेंडर्स एक्ट, 1958, धारा 3) | 3 साल तक जेल (आम तौर पर कम से कम 3 महीने) और ₹5 लाख तक जुर्माना (धारा 17)। |
| राजस्थान | लाइसेंस (राजस्थान साहूकार अधिनियम, 1963) | अदालत दावे की सुनवाई किए बिना मुकदमा खारिज करेगी (धारा 11)। |
| पंजाब और दिल्ली | रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस (पंजाब रजिस्ट्रेशन ऑफ़ मनी-लेंडर्स एक्ट, 1938; दिल्ली का विधि विभाग इसे दिल्ली में लागू कानूनों में गिनता है) | उधार वसूली का मुकदमा खारिज होगा (धारा 3)। |
| उत्तर प्रदेश | 1976 का साहूकारी कानून (U.P. Regulation of Money Lending Act, 1976) 2022 में रद्द कर दिया गया (उ.प्र. अधिनियम 18, 2022)। | अब आपके उधार पर क्या लागू है, यह वकील से पूछें। |
आपका राज्य तालिका में नहीं है, तो हमने उसे अभी जाँचा नहीं है। आपके राज्य का साहूकारी रजिस्ट्रार या वकील बता सकता है कि क्या लागू है।
वे कानून जो एक बार उधार देने वाले पर भी लागू होते हैं
कुछ राज्य इससे आगे जाते हैं और किसी भी व्यक्ति के ब्याज पर सीमा लगाते हैं, सिर्फ़ लाइसेंसी साहूकार पर नहीं:
- कर्नाटक: "कोई भी व्यक्ति अपने दिए उधार पर अत्यधिक ब्याज नहीं लेगा" (अत्यधिक ब्याज निषेध अधिनियम, 2004, धारा 3)। अत्यधिक का मतलब है राज्य की तय साहूकारी दर से ऊपर कोई भी दर, चाहे घंटे, दिन, किस्त या महीने के हिसाब से ली जाए। मार्च 2025 से सज़ा 10 साल तक जेल और ₹5 लाख तक जुर्माना है (धारा 4)।
- तमिलनाडु: 2003 के कानून में यही शब्द हैं (धारा 3)। डेली वट्टी, घंटे की वट्टी, कंधु वट्टी, मीटर वट्टी और थंडल, जो राज्य की दर से ऊपर बैठें, सब अत्यधिक ब्याज हैं। सज़ा: 3 साल तक जेल और ₹30,000 तक जुर्माना (धारा 4)।
- केरल: 2012 का कानून (धारा 3) मनी-लेंडर्स एक्ट की दर से ऊपर ब्याज पर रोक लगाता है। सज़ा: 3 साल तक जेल और ₹50,000 तक जुर्माना; वसूली के लिए कर्ज़दार को परेशान करने पर 1 साल तक जेल और ₹10,000 तक जुर्माना (धारा 9)।
- गुजरात: "कोई साहूकार या उधार देने वाला व्यक्ति" अधिसूचित अधिकतम दर से ज़्यादा ब्याज नहीं माँग सकता (मनी-लेंडर्स एक्ट, 2011, धारा 33(3))। ज़्यादा वसूला गया हो, तो उधार चुका हुआ माना जाएगा और ज़्यादा रकम लौटानी होगी (धारा 33(4))। गुजरात की दर वाली अधिसूचना हमने अभी नहीं पढ़ी है।
- पश्चिम बंगाल: 1940 का कानून तय करता है कि किसी भी "उधार देने वाले" को कर्ज़दार से ज़्यादा से ज़्यादा कितना मिल सकता है; यह शब्द हर उस व्यक्ति के लिए है जो उधार देता है (धारा 2 और 30)।
"कोई भी व्यक्ति" जैसे शब्द लाइसेंसी साहूकार से आगे जाते हैं, फिर भी अदालतें बातें देखती हैं: ऊपर वाला केरल का केस इसलिए भी रद्द हुआ कि न धंधे का कोई सबूत था, न अत्यधिक ब्याज का। रुपये सैकड़ा में असली सीमाएँ हमारी राज्यवार कानूनी ब्याज दर गाइड में हैं।
क्या ₹2 सैकड़ा ब्याज कानूनी है? पूरा उदाहरण
मान लीजिए आपने दोस्त को ₹2 सैकड़ा पर ₹50,000 दिए। यह हर महीने ₹1,000 है, यानी 24% सालाना। यही उधार तीन राज्यों की बिना ज़मानत वाली सबसे ऊँची दर पर कितना कमाता, देखिए:
| दर | % सालाना | ₹ सैकड़ा | हर महीने ब्याज |
|---|---|---|---|
| आपकी दर | 24% | ₹2.00 | ₹1,000 |
| केरल की सीमा | 18% | ₹1.50 | ₹750 |
| कर्नाटक की सीमा, बिना ज़मानत | 16% | ₹1.33 | ₹666.67 |
| तमिलनाडु की सीमा, बिना ज़मानत | 12% | ₹1.00 | ₹500 |
यानी ₹2 सैकड़ा हमारी जाँची हर राज्य सीमा से ऊपर है; सबसे ऊँची सीमा, पश्चिम बंगाल में व्यापार के बिना ज़मानत वाले उधार पर 20%, भी ₹1.67 सैकड़ा ही है। कोई सीमा आप पर लागू होती है या नहीं, यह आपके राज्य पर और इस पर टिका है कि आप धंधे की तरह उधार देते हैं या नहीं।
कैलकुलेटर में आज़माएँकोई भी सैकड़ा दर % सालाना में बदलें, फिर अपने राज्य की सीमा से मिलाएँक्या नकद उधार देना गैरकानूनी है?
नहीं, पर नकद पर इनकम टैक्स का जुर्माना लग सकता है। आयकर अधिनियम, 2025 (1 अप्रैल 2026 से लागू) के तहत कोई भी ₹20,000 या उससे ज़्यादा का उधार (उसी व्यक्ति का बाकी बकाया जोड़कर) अकाउंट पेयी चेक, अकाउंट पेयी बैंक ड्राफ़्ट, बैंक खाते से इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग या किसी और तय इलेक्ट्रॉनिक तरीके के बिना नहीं ले सकता (धारा 185)। जुर्माना, उधार की रकम के बराबर, उधार लेने वाले पर लगता है (धारा 450)। ₹20,000 या ज़्यादा नकद में लौटाना भी मना है (धारा 188), और जुर्माना लौटाई रकम के बराबर है (धारा 453)।
नकद का नियम टूटने से उधार शून्य नहीं हो जाता। संजबिज तारी बनाम किशोर एस. बोरकर (25 सितंबर 2025) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुरानी धारा 269SS तोड़ने पर सिर्फ़ टैक्स का जुर्माना लगता है, और उस राय को रद्द किया कि ₹20,000 से ऊपर का नकद उधार "गैरकानूनी और शून्य" है। नई धारा 185 और 450 में भी सिर्फ़ जुर्माना है; वे उधार को शून्य नहीं कहतीं।
फिर भी बड़ी रकम बैंक से दें, अकाउंट पेयी चेक या बैंक ट्रांसफ़र से। बैंक का रिकॉर्ड इस बात का सबूत है कि पैसा उधार दिया गया।
क्या मिले ब्याज पर टैक्स लगता है?
हाँ। ब्याज आमदनी है। अगर उधार देना आपका धंधा नहीं है, तो यह आम तौर पर "अन्य स्रोतों से आय" (आयकर अधिनियम, 2025, धारा 92) में आता है और साल की आमदनी में जुड़ता है। आपके मामले में यह कैसे लागू होगा, यह CA बता सकता है।
धमकी और ज़ोर-ज़बरदस्ती अपराध है
बकाया कितना भी हो, डरा-धमकाकर वसूली भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में अपराध है, जिसने IPC की जगह ली है:
- आपराधिक धमकी (धारा 351): किसी को उसके शरीर, इज़्ज़त या संपत्ति को नुकसान की धमकी देकर कुछ करवाना। 2 साल तक जेल; मौत, गंभीर चोट या संपत्ति जलाने की धमकी पर 7 साल तक।
- उगाही (एक्सटॉर्शन) (धारा 308): डर दिखाकर किसी से संपत्ति लेना या कागज़ पर दस्तख़त करवाना। 7 साल तक जेल।
- आत्महत्या के लिए उकसाना (धारा 108): 10 साल तक जेल।
राज्यों ने ज़बरदस्ती वसूली के लिए अपने अपराध भी बनाए हैं:
- महाराष्ट्र (2014 का कानून, धारा 45): साहूकार का कर्ज़ वसूलने के लिए कर्ज़दार को परेशान करना, जैसे धमकाना, पीछा करना या घर-दुकान के पास मंडराना। 3 साल तक जेल, ₹1 लाख तक जुर्माना, या दोनों (2026 का संशोधन)।
- कर्नाटक (माइक्रो लोन और स्मॉल लोन (ज़बरदस्ती की कार्रवाई की रोकथाम) अधिनियम, 2025): ज़बरदस्ती वसूली पर 10 साल तक जेल और ₹5 लाख तक जुर्माना (धारा 13)। कानून से पहले दिए उधार पर बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस वाला उधारदाता कमज़ोर वर्ग के कर्ज़दार से ज़बरदस्ती करे, तो पूरा उधार चुका हुआ माना जाता है (धारा 15)।
- तमिलनाडु (मनी लेंडिंग एंटिटीज़ (ज़बरदस्ती की कार्रवाई की रोकथाम) अधिनियम, 2025): हरकत के हिसाब से 3 या 5 साल तक जेल, या ₹5 लाख तक जुर्माना, या दोनों (धारा 21)।
पैसा वापस पाने का कानूनी तरीका जानने के लिए देखें: उधार दिया पैसा वापस कैसे लें।
अगर आप उधार लेने वाले हैं
- अदालत ज़्यादा ब्याज काट सकती है। सूदखोरी उधार अधिनियम (Usurious Loans Act), 1918 की धारा 3 के तहत, अगर ब्याज अत्यधिक है और सौदा काफ़ी हद तक अनुचित था, तो अदालत लेन-देन दोबारा खोलकर आपको ज़्यादा ब्याज से छुटकारा दे सकती है। यह केंद्र का कानून है, जिसमें कुछ राज्यों ने बदलाव किए हैं।
- कानूनी दर से पैसा अदालत में जमा कर सकते हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में अत्यधिक ब्याज झेल रहा कर्ज़दार बकाया रकम, राज्य की दर के ब्याज के साथ, अदालत में जमा कर सकता है (हर राज्य के कानून की धारा 5)। उस दर से ऊपर दिया ब्याज अदालत उधार में घटा सकती है (धारा 8) और उधार के बदले ली गई संपत्ति लौटाने का आदेश दे सकती है (धारा 6)।
- धमकी मिले तो पुलिस के पास जाएँ। कर्नाटक का 2025 का कानून कहता है कि कोई पुलिस अधिकारी उसके तहत शिकायत दर्ज करने से मना नहीं करेगा (धारा 10)।
उधार देने से पहले क्या करें
- लिखा-पढ़ी करें। रकम, तारीख, दोनों रूप में दर (जैसे "₹2 प्रति ₹100 महीना, यानी 24% सालाना, साधारण"), ब्याज कब देना है, और दोनों के दस्तख़त। सबसे आसान लिखित रूप प्रोनोट है।
- बैंक से पैसा दें। चेक या बैंक ट्रांसफ़र उधार का सबूत है, और ₹20,000 या ज़्यादा का उधार नकद में नहीं लिया जा सकता।
- रसीद लें और दें। हर भुगतान की तारीख वाली रसीद हो, जिसमें लिखा हो कि कितना ब्याज में गया और कितना मूलधन में (भुगतान पहले ब्याज में क्यों जाता है)।
- दर को अपने राज्य की सीमा से मिलाएँ। रेट कन्वर्टर से बदलें और हमारी राज्यवार तालिका से मिलाएँ।
- ज़्यादा देर न करें। अदालत जाने के लिए कानून तय समय देता है; देखें उधार वसूली की समय-सीमा।
- धमकी से वसूली कभी न करें। कर्ज़दार पैसा न लौटाए, तो कानूनी तरीके अपनाएँ।
स्रोत
- भारत का संविधान, सातवीं अनुसूची (विधायी विभाग): राज्य सूची, प्रविष्टि 30, साहूकारी और साहूकार।
- महाराष्ट्र साहूकारी (विनियमन) अधिनियम, 2014, संशोधन अधिनियम 39, 2026 के साथ: धारा 2, 13, 39 और 45।
- अशोक कमर्शियल एंटरप्राइज़ेज़ बनाम हबटाउन लिमिटेड, बॉम्बे हाई कोर्ट, 21 जनवरी 2026।
- मनोज जॉर्ज बनाम केरल राज्य, केरल हाई कोर्ट, 4 दिसंबर 2024: इसमें केरल मनी-लेंडर्स एक्ट की धारा 3 और 17, और 2012 के कानून की धारा 3 और 9 भी उद्धृत हैं।
- कर्नाटक मनी-लेंडर्स एक्ट, 1961: धारा 5 और 11।
- कर्नाटक अत्यधिक ब्याज निषेध अधिनियम, 2004, संशोधन अधिनियम 17, 2025 के साथ: धारा 2 से 8।
- कर्नाटक माइक्रो लोन और स्मॉल लोन (ज़बरदस्ती की कार्रवाई की रोकथाम) अधिनियम, 2025: धारा 1, 2, 3, 10, 13 और 15।
- तमिलनाडु मनी-लेंडर्स एक्ट, 1957: धारा 2, 3 और 17।
- तमिलनाडु अत्यधिक ब्याज निषेध अधिनियम, 2003: धारा 2 से 8।
- तमिलनाडु मनी लेंडिंग एंटिटीज़ (ज़बरदस्ती की कार्रवाई की रोकथाम) अधिनियम, 2025: धारा 3, 5, 18, 20 और 21; 19 नवंबर 2025 से लागू (G.O. Ms. No. 580, गृह विभाग)।
- केरल अत्यधिक ब्याज निषेध अधिनियम, 2012 (India Code): धारा 2, 3, 5, 6, 8 और 9।
- राजस्थान साहूकार अधिनियम, 1963 (राजस्व विभाग): धारा 11।
- पंजाब रजिस्ट्रेशन ऑफ़ मनी-लेंडर्स एक्ट, 1938: धारा 3; दिल्ली में लागू किए गए कानूनों की सूची (विधि विभाग, दिल्ली)।
- गुजरात मनी-लेंडर्स एक्ट, 2011: धारा 33।
- बंगाल मनी-लेंडर्स एक्ट, 1940 (कोलकाता कलेक्टरेट): धारा 2 और 30।
- उत्तर प्रदेश निरसन अधिनियम, 2022।
- सूदखोरी उधार अधिनियम (Usurious Loans Act), 1918 (त्रिपुरा हाई कोर्ट की प्रति): धारा 3।
- आयकर अधिनियम, 2025 (भारत का राजपत्र): धारा 1, 92, 185, 188, 450 और 453।
- संजबिज तारी बनाम किशोर एस. बोरकर, सुप्रीम कोर्ट, 2025 INSC 1158: पैरा 20।
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (गृह मंत्रालय): धारा 108, 308, 351 और 358।
6 छोटे जवाबब्याज पर उधार: कानूनी सवाल और जवाब
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क्या दोस्त को दिए उधार पर ब्याज ले सकते हैं?
हाँ। हमने जो कानून पढ़े, उनमें निजी उधार पर ब्याज की रोक नहीं है। दर लिखकर तय करें, अगर आपके राज्य की सीमा आप पर लागू है तो उसके भीतर रहें (कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में "अत्यधिक ब्याज" किसी के लिए भी मना है), और पैसा बैंक से दें। बहुत लोगों को बार-बार उधार देना धंधा बन सकता है, जिसके लिए लाइसेंस चाहिए।
क्या रिश्तेदार को एक बार उधार देने के लिए लाइसेंस चाहिए?
आम तौर पर नहीं। राज्यों के साहूकारी लाइसेंस उधार के धंधे वालों के लिए हैं। केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि एक-दो बार दिया हाथ-उधार साहूकारी नहीं है, और बॉम्बे हाई कोर्ट सिस्टम, बार-बार होना और निरंतरता देखता है। नियमित उधार देते हैं, तो अपने राज्य का कानून देखें या वकील से पूछें।
क्या बिना लाइसेंस वाला साहूकार अदालत से पैसा वसूल सकता है?
कई राज्यों में नहीं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान के कानून, और पंजाब का रजिस्ट्रेशन कानून (जिसे दिल्ली में भी लागू माना गया है), अदालत से कहते हैं कि बिना वैध लाइसेंस वाले साहूकार का मुकदमा खारिज करे या डिक्री न दे। यह धंधे वाले साहूकारों की बात है; आप उनमें गिने जाएँगे या नहीं, यह बातों पर टिका है।
क्या ₹20,000 या ज़्यादा का नकद उधार गैरकानूनी है?
उधार शून्य नहीं होता, पर लेने वाले पर जुर्माना लग सकता है। ₹20,000 या ज़्यादा का उधार नकद में लेना आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 185 तोड़ता है, और जुर्माना उधार की रकम के बराबर है (धारा 450)। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नकद का नियम टूटने से कर्ज़ गैरकानूनी या वसूली के अयोग्य नहीं होता।
क्या निजी उधार पर मिले ब्याज पर टैक्स लगता है?
हाँ। ब्याज आमदनी है। अगर उधार देना आपका धंधा नहीं है, तो यह आम तौर पर आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 92 के "अन्य स्रोतों से आय" में आता है और साल की आमदनी में जुड़ता है। आपके मामले में कैसे लागू होगा, यह CA से पूछें।
साहूकार किसे कहते हैं?
साहूकार वह है जो ब्याज पर उधार देने का धंधा करता है; अंग्रेज़ी में money-lender। राजस्थान के Money-Lenders Act का हिंदी नाम ही राजस्थान साहूकार अधिनियम है। जो दोस्त आपको एक बार उधार दे, वह इस अर्थ में साहूकार नहीं है।