प्रोनोट (वचन पत्र) उधार लेने वाले के दस्तख़त वाला, तय रकम चुकाने का बिना शर्त लिखित वादा है। माँगने पर देय प्रोनोट पर तारीख़ से 3 साल तक केस हो सकता है। दर न लिखी हो तो कानून साल का 18% (₹1.50 सैकड़ा) लगाता है। उदाहरण: ₹50,000 पर ₹1.50 सैकड़ा, 15 जनवरी से 25 अक्टूबर 2026 तक ब्याज ₹7,000।
इस पेज पर8
प्रोनोट (वचन पत्र) क्या होता है
परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act, NI एक्ट), 1881 की धारा 4 के अनुसार प्रोनोट एक लिखा हुआ काग़ज़ है, जिस पर बनाने वाले के दस्तख़त हों और जिसमें किसी तय आदमी को, या उसके आदेश पर, तय रकम चुकाने का बिना शर्त वादा हो। उधार में प्रोनोट उधार लेने वाला लिखता है, और रकम उधार देने वाले को मिलनी होती है।
- "मैं B को या उसके आदेश पर ₹500 देने का वादा करता हूँ" प्रोनोट है: कानून ख़ुद यही उदाहरण देता है।
- "श्री B, I.O.U. ₹1,000" प्रोनोट नहीं है: कानून इसे "प्रोनोट नहीं" वाले उदाहरणों में गिनता है। इसकी जगह साफ़ लिखिए कि रकम चुकाने का वादा है।
- शर्त वाला वादा ("मेरी शादी के बाद", "अगर D इतना छोड़ जाए") भी प्रोनोट नहीं है। वादा बिना शर्त होना चाहिए।
- "धारक को" (bearer) नहीं। RBI एक्ट, 1934 की धारा 31 के अनुसार धारक को देय प्रोनोट सिर्फ़ RBI और केंद्र सरकार बना सकते हैं। उधार देने वाले का नाम लिखिए, "या उनके आदेश पर"।
जिस प्रोनोट में चुकाने का समय न लिखा हो, वह माँगने पर देय (on demand) होता है (इसी कानून की धारा 19)। प्रोनोट में तय तारीख़ या किस्तें भी लिखी जा सकती हैं; इससे स्टांप और समय-सीमा बदल जाती है, जैसा नीचे बताया है।
प्रोनोट कैसे भरे: फॉर्मेट और हर खाना
- ऊपर जगह और तारीख़। माँगने पर देय प्रोनोट में समय-सीमा इसी तारीख़ से गिनी जाती है, इसलिए साफ़ लिखिए।
- रकम अंकों में और शब्दों में, दोनों जगह एक जैसी।
- उधार लेने वाले का पूरा नाम, पिता या पति का नाम और पता, फिर "अदा करने का वादा करता/करती हूँ"।
- उधार देने वाले का पूरा नाम और पता, "या उनके आदेश पर"। "धारक को" कभी नहीं।
- "माँगने पर", या अगर तय हुई हो तो चुकाने की तारीख़।
- ब्याज दोनों तरह से, जैसे "₹1.50 सैकड़ा महीना (साल का 18%), साधारण ब्याज, इस तारीख़ से"। दोनों लिखने से बाद में यह झगड़ा नहीं होता कि "1.5 टका" का मतलब क्या था।
- पैसा कैसे दिया: बैंक ट्रांसफर, UPI या चेक, रेफ़रेंस नंबर के साथ। इससे प्रोनोट उस भुगतान से जुड़ जाता है।
- रेवेन्यू टिकट (रसीदी टिकट), जिस पर उधार लेने वाला तारीख़ के साथ दस्तख़त करे।
- गवाह (ज़रूरी नहीं): नाम, पता और दस्तख़त।
प्रोनोट पर स्टांप ड्यूटी: कितने का रेवेन्यू टिकट
संविधान प्रोनोट पर स्टांप ड्यूटी की दर तय करने का अधिकार संसद को देता है (सातवीं अनुसूची, संघ सूची, प्रविष्टि 91)। यह दर केंद्र के भारतीय स्टांप अधिनियम (Indian Stamp Act), 1899 की अनुसूची I के अनुच्छेद 49 में है। माँगने पर देय प्रोनोट के लिए केंद्र की 2004 की अधिसूचना (S.O. 130(E), 1 मार्च 2004 से) ने ये दरें तय कीं:
| प्रोनोट की रकम | स्टांप ड्यूटी |
|---|---|
| ₹250 तक | 5 पैसे |
| ₹250 से ऊपर, ₹1,000 तक | 10 पैसे |
| ₹1,000 से ऊपर | 15 पैसे |
- ₹1 का रेवेन्यू टिकट क्यों? ड्यूटी कुछ पैसे ही है, इसलिए लोग ₹1 का रेवेन्यू टिकट लगाते हैं। ड्यूटी से ज़्यादा का टिकट लगाने में दिक़्क़त नहीं: कानून उस काग़ज़ को सही स्टांप वाला मानता है जिस पर स्टांप "सही रकम से कम न हो" (धारा 2(11))।
- टिकट काटिए। चिपकाने वाले टिकट पर दस्तख़त करने वाला उसे ऐसे काटे कि दोबारा काम न आए, जैसे उस पर तारीख़ के साथ अपना नाम या दस्तख़त (धारा 12)। बिना कटा टिकट, टिकट न होने के बराबर माना जाता है।
- तय तारीख़ पर देय प्रोनोट अनुच्छेद 49(b) में आता है, जिसकी ड्यूटी बिल ऑफ़ एक्सचेंज की दरों से जुड़ी है और रकम के साथ बढ़ती है। ऐसा प्रोनोट लिखने से पहले सही ड्यूटी पता कर लीजिए।
बिना टिकट या कम टिकट वाला प्रोनोट
स्टांप एक्ट की धारा 35 कहती है कि जिस काग़ज़ पर स्टांप लगना चाहिए था और नहीं लगा, वह सबूत में नहीं लिया जाएगा। इसका परंतुक (proviso) अदालत को यह छूट देता है कि बाकी ड्यूटी और जुर्माना भरने पर उसे ले ले: ₹5, या बाकी ड्यूटी का 10 गुना, जो ज़्यादा हो। 2006 तक केंद्र के कानून में प्रोनोट इस छूट से बाहर थे। 2006 के कानून (Act 21 of 2006) ने यह अपवाद हटा दिया, इसलिए केंद्र के कानून में अब बिना टिकट वाला प्रोनोट भी ड्यूटी और जुर्माना भरकर लिया जा सकता है।
इस छूट के भरोसे मत रहिए। कुछ राज्यों का अपना स्टांप कानून या धारा 35 का अपना रूप है, और पुराने फ़ैसलों में कम टिकट वाले प्रोनोट को सबूत में बेकार माना गया। दस्तख़त के समय ही सही टिकट लगाइए।
प्रोनोट पर ब्याज: दर न लिखी हो तो कितना
प्रोनोट पर ब्याज की दर न लिखी हो, तो NI एक्ट की धारा 80 साल का 18% लगाती है, यानी ₹1.50 सैकड़ा, और कहती है कि यह दर प्रोनोट के पक्षों के बीच ब्याज के किसी भी समझौते के बावजूद लगेगी। यह ब्याज उस तारीख़ से लगता है जब पैसा चुकाया जाना चाहिए था, अदायगी तक। अलग दर चाहिए तो प्रोनोट पर दोनों तरह से लिखिए, और यह भी कि किस तारीख़ से।
कैलकुलेटर में आज़माएँसाल का 18% कितने रुपये सैकड़ा है, रेट कन्वर्टर में देखिए: ₹1.50लिखी हुई दर अपने आप पूरी जायज़ नहीं हो जाती। कुछ राज्य ब्याज की सीमा तय करते हैं, और ये सीमाएँ अलग-अलग हैं: देखिए भारत में कानूनी ब्याज दर और ब्याज पर पैसे देना कानूनी है या नहीं।
प्रोनोट की वैधता: 3 साल की मियाद
प्रोनोट ख़ुद "ख़त्म" नहीं होता, पर उस पर केस करने का हक़ ख़त्म हो जाता है। लिमिटेशन एक्ट (परिसीमा अधिनियम), 1963 3 साल देता है, जो यहाँ से गिने जाते हैं:
- माँगने पर देय: प्रोनोट की तारीख़ से (अनुच्छेद 35), उस दिन से नहीं जब आप पैसा माँगें। यह तब, जब प्रोनोट के साथ दिया कोई अलग लिखा काग़ज़ केस करने का हक़ आगे न टालता हो।
- तय तारीख़ पर देय: जिस दिन रकम देय हो (अनुच्छेद 31)।
- किस्तों में देय: हर किस्त की तारीख़ से (अनुच्छेद 36)। अगर लिखा हो कि एक किस्त चूकने पर पूरी रकम देय होगी, तो उस चूक से (अनुच्छेद 37)।
दो बातें नए 3 साल शुरू करती हैं, पर तभी जब ये मियाद ख़त्म होने से पहले हों: उधार लेने वाले के दस्तख़त वाली लिखित स्वीकृति कि कर्ज़ बाकी है (धारा 18), या कर्ज़ में किया गया भुगतान, जिसकी बात भुगतान करने वाले की लिखावट में हो या उसके दस्तख़त वाले काग़ज़ पर (धारा 19)। मियाद बीतने के बाद किया गया केस अदालत को ख़ारिज करना ही होता है, चाहे उधार लेने वाला यह बात उठाए या नहीं (धारा 3)। तब भी एक रास्ता बचता है: उधार लेने वाला पुराना कर्ज़ चुकाने का नया लिखित वादा दस्तख़त करके दे, तो भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 25(3) इसे वैध अनुबंध मानती है। पूरे नियम, तारीख़ों की टेबल के साथ, उधार वसूली की समय-सीमा में हैं।
उदाहरण: ₹50,000 का प्रोनोट, ₹1.50 सैकड़ा
उधार लेने वाला 15 जनवरी 2026 को ₹50,000 का माँगने पर देय प्रोनोट लिखता है, ब्याज ₹1.50 सैकड़ा महीना (साल का 18%), साधारण। ब्याज हर महीने ₹750 बनता है।
- 25 अक्टूबर 2026 तक ब्याज: 9 महीने 10 दिन, ₹750 महीना के हिसाब से = ₹7,000, यानी कुल ₹57,000 बकाया।
- केस की आख़िरी तारीख़, अगर कुछ न बदले: प्रोनोट की तारीख़ से 3 साल, 15 जनवरी 2029।
- दस्तख़त वाला आंशिक भुगतान: 15 दिसंबर 2027 को उधार लेने वाला ₹5,000 देता है और उसकी एंट्री पर दस्तख़त करता है। तब तक बकाया ब्याज ₹17,250 (23 महीने) है, इसलिए पूरे ₹5,000 ब्याज में जाते हैं: ₹12,250 ब्याज अभी बाकी है और मूल ₹50,000 ही रहता है। देखिए पहले ब्याज क्यों कटता है।
- नई आख़िरी तारीख़: भुगतान से नए 3 साल, 15 दिसंबर 2030।
| तारीख़ | क्या हुआ | केस की आख़िरी तारीख़ |
|---|---|---|
| 15 जनवरी 2026 | प्रोनोट लिखा गया; मियाद शुरू (अनुच्छेद 35) | 15 जनवरी 2029 |
| 25 अक्टूबर 2026 | अब तक ब्याज ₹7,000; कुल ₹57,000 | 15 जनवरी 2029 |
| 15 दिसंबर 2027 | ₹5,000 दिए और दस्तख़त किए; नए 3 साल शुरू (धारा 19) | 15 दिसंबर 2030 |
अगर इसी प्रोनोट पर दर न लिखी होती, तो भी कानून साल का 18% लगाता, पर सिर्फ़ उस तारीख़ से जब पैसा चुकाया जाना चाहिए था। दर और "इस तारीख़ से" लिख देने से यह सवाल ही नहीं उठता।
कैलकुलेटर में आज़माएँ₹50,000 पर ₹1.50 सैकड़ा, 15 जनवरी से 25 अक्टूबर 2026 तक का ₹7,000 ब्याज जाँचिएस्रोत
- परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act), 1881: धारा 4 (प्रोनोट, I.O.U. वाले उदाहरण के साथ), धारा 19 (माँगने पर देय), धारा 80 (दर न लिखी हो तो 18%)।
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, धारा 31: धारक को देय प्रोनोट सिर्फ़ RBI या केंद्र सरकार बना सकती है।
- भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899, अनुसूची I के साथ (पश्चिम बंगाल वित्त विभाग की प्रति): धारा 2(11) और 12, और अनुच्छेद 49, 28 जनवरी 2004 की S.O. 130(E) वाली दरों के साथ।
- भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899, धारा 35: ड्यूटी और जुर्माना भरकर बिना टिकट वाला काग़ज़ सबूत में लेना, Act 21 of 2006 के बदलाव के साथ।
- भारत का संविधान, सातवीं अनुसूची (विधायी विभाग): संघ सूची, प्रविष्टि 91, प्रोनोट पर स्टांप ड्यूटी की दर।
- लिमिटेशन एक्ट (परिसीमा अधिनियम), 1963: धारा 3 और अनुसूची के अनुच्छेद 31, 35, 36 और 37; धारा 18; धारा 19।
- भारतीय संविदा अधिनियम (Contract Act), 1872: धारा 25(3), मियाद बीते कर्ज़ को चुकाने का लिखित, दस्तख़त वाला वादा।
- आयकर अधिनियम, 2025, धारा 185: ₹20,000 या ज़्यादा का उधार नक़द में नहीं लिया जा सकता।
6 छोटे जवाबप्रोनोट की वैधता, ब्याज और टिकट: सवाल-जवाब
खोलें ▾बंद करें ▴
प्रोनोट कितने साल तक वैध रहता है?
उस पर केस करने के लिए 3 साल मिलते हैं। माँगने पर देय प्रोनोट में ये प्रोनोट पर लिखी तारीख़ से गिने जाते हैं (लिमिटेशन एक्ट, अनुच्छेद 35); तय तारीख़ वाले में उस तारीख़ से (अनुच्छेद 31)। 3 साल पूरे होने से पहले दस्तख़त वाली स्वीकृति या दस्तख़त वाला आंशिक भुगतान हो जाए, तो नए 3 साल शुरू होते हैं।
प्रोनोट पर ब्याज दर न लिखी हो तो कितना ब्याज लगेगा?
साल का 18%, यानी ₹1.50 सैकड़ा। NI एक्ट की धारा 80 यह दर तब लगाती है जब प्रोनोट पर कोई दर न लिखी हो, उस तारीख़ से जब पैसा चुकाया जाना चाहिए था, अदायगी तक। अलग दर लेनी हो तो प्रोनोट पर दोनों तरह लिखिए: रुपये सैकड़ा महीना और साल का प्रतिशत।
प्रोनोट पर कितने रुपये का रेवेन्यू टिकट लगाएँ?
माँगने पर देय प्रोनोट पर केंद्र की ड्यूटी रकम के हिसाब से 5 पैसे, 10 पैसे या 15 पैसे है (₹1,000 से ऊपर 15 पैसे)। लोग आम तौर पर ₹1 का रेवेन्यू टिकट लगाते हैं, जो ठीक है, क्योंकि टिकट सही रकम से कम नहीं होना चाहिए। उधार लेने वाला उस पर तारीख़ के साथ दस्तख़त करे।
क्या बिना गवाह के प्रोनोट मान्य है?
हाँ। कानूनी परिभाषा में लिखा हुआ, बिना शर्त, तय रकम चुकाने का वादा और बनाने वाले के दस्तख़त चाहिए; गवाह की शर्त नहीं है। फिर भी एक-दो गवाह काम आते हैं: अगर उधार लेने वाला बाद में दस्तख़त से मुकर जाए, तो देखने वाला गवाही दे सकता है।
प्रोनोट पर ज़्यादा से ज़्यादा कितनी रकम लिख सकते हैं?
NI एक्ट में कोई सीमा नहीं है, और माँगने पर देय प्रोनोट पर ₹1,000 से ऊपर हर रकम का टिकट 15 पैसे ही है। पर उधार लेने वाला ₹20,000 या ज़्यादा का उधार नक़द में नहीं ले सकता (आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 185), इसलिए चेक या बैंक ट्रांसफर से दीजिए और रेफ़रेंस प्रोनोट पर लिखिए।
क्या 3 साल बाद प्रोनोट पर पैसा वसूल हो सकता है?
आम तौर पर उस प्रोनोट पर केस करके नहीं: मियाद बीतने के बाद का केस अदालत को ख़ारिज करना होता है, चाहे उधार लेने वाला यह बात उठाए या नहीं। बात अलग है अगर समय रहते दस्तख़त वाली स्वीकृति या भुगतान से मियाद फिर शुरू हुई हो, या उधार लेने वाला चुकाने का नया लिखित वादा दस्तख़त करके दे। देखिए 3 साल का नियम।